India to replace coal fired power plants with renewables2

सोलर-बैटरी से कोयले जैसी भरोसेमंद बिजली ₹5.25 प्रति यूनिट, SECI नीलामी का बड़ा संकेत

निशान्त, Climate कहानी, कोलकाता: भारत में सौर और पवन ऊर्जा अब सिर्फ दिन में मिलने वाली सस्ती बिजली तक सीमित नहीं रह सकती। एक नई नीलामी और उसके आधार पर किए गए अध्ययन से संकेत मिलता है कि बैटरी स्टोरेज के साथ रिन्यूएबल एनर्जी को कोयले जैसी लगातार और भरोसेमंद बिजली के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) की 1,000 मेगावाट की राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल एनर्जी नीलामी में बिजली की कीमत ₹5.25 प्रति यूनिट तय हुई है। यह कीमत 25 साल तक नाममात्र रूप से स्थिर रहेगी।


नीलामी की खासियत

SECI की नीलामी सामान्य सौर बिजली खरीद से अलग तरीके से डिजाइन की गई थी। बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत शाम, रात और सुबह होती है, इसलिए उन्हीं घंटों में ज्यादा बिजली उपलब्ध कराने की शर्त रखी गई।

  • पीक घंटों में कम से कम 90% क्षमता
  • सूरज न होने वाले घंटों में 70%
  • दिन के सौर घंटों में 50-60%

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कमी रहने पर कॉन्ट्रैक्ट कीमत की 1.5 गुना दर से जुर्माना लग सकता है। यानी सिर्फ सोलर पैनल लगाना पर्याप्त नहीं, बैटरी स्टोरेज जरूरी है।


अध्ययन के निष्कर्ष

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले स्थित India Energy & Climate Center (IECC) के अध्ययन India’s Renewable Energy Breakthrough: Coal-Like Reliability at a Lower, Fixed Price में कहा गया है कि राजस्थान जैसे अच्छे सौर क्षेत्रों में हर 1,000 मेगावाट के लिए करीब 3,000 मेगावाट सौर और 12 गीगावाट-घंटे बैटरी पर्याप्त हो सकती है।

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IECC के निदेशक उमेद पालिवाल के अनुसार भारत की भौगोलिक स्थिति इस मॉडल के लिए अनुकूल है। मुख्य चुनौती दिन की सौर बिजली को शाम-रात तक पहुंचाने की है, जिसमें कम लागत वाली बैटरी मददगार साबित हो सकती है।


कीमत का महत्व

16 कंपनियों ने बोली लगाई और सात डेवलपरों को क्षमता मिली। सभी विजेता बोलियां ₹5.25 से ₹5.26 के बीच रहीं। अध्ययन के सह-लेखक निकित अभ्यंकर के मुताबिक यह बाजार मानक बन सकती है। 25 साल तक कीमत स्थिर रहने से महंगाई के साथ वास्तविक कीमत घटती जाएगी।

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उद्योगों के लिए फायदा

डेटा सेंटर, एल्युमिनियम, स्टील जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए ₹5.25 प्रति यूनिट पर 25 साल तक भरोसेमंद और स्वच्छ बिजली आकर्षक विकल्प बन सकती है।


निष्कर्ष: SECI की यह नीलामी बताती है कि भारत अब सिर्फ सौर-पवन क्षमता बढ़ाने से आगे बढ़कर भरोसेमंद रिन्यूएबल बिजली की ओर बढ़ रहा है। बैटरी स्टोरेज इस बदलाव की अहम कड़ी है।

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“निशांत जी जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर रिपोर्टिंग करते हैं। देश दुनिया में पर्यावरणीय मुद्दों, प्रदूषण, वन संरक्षण और जलवायु प्रभाव की ग्राउंड रिपोर्टिंग में विशेष रुचि रखते हैं।”

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