कोलकाता हिन्दी न्यूज | 13 सितम्बर 2026: ‘विकसित भारत 2047’ के दीर्घकालिक विकास लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए स्कॉटिश चर्च कॉलेज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार और करियर काउंसलिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
शुक्रवार और शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और पेशेवरों ने हिस्सा लिया।
आयोजन और सहयोग
स्कॉटिश चर्च कॉलेज के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के सहयोग से तथा कॉलेज के इनोवेशन सेल के संयुक्त प्रयास से कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कॉलेज की प्राचार्या डॉ. मधुमंजरी मंडल, उपप्राचार्य डॉ. सुप्रतिम दास और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के प्रमुख डॉ. सीएमए विभाष आचार्य के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में 10 बाहरी कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया। कुल 435 विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
पहले दिन: करियर काउंसलिंग
कार्यक्रम के दौरान ‘विकसित भारत’ की अवधारणा को केंद्र में रखते हुए चार अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 25 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। पहले दिन मुख्य रूप से करियर काउंसलिंग और अकादमिक सहभागिता पर जोर दिया गया।
विद्यार्थियों को विभिन्न पेशों और शिक्षा के क्षेत्रों से जुड़े विशिष्ट व्यक्तित्वों के साथ सीधे संवाद करने का अवसर मिला।
इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के सचिव सीएमए डॉ. डी. पी. नंदी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
भविष्य में करियर का सही चुनाव, उच्च शिक्षा की योजना और पेशेवर जीवन की तैयारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई।
दूसरे दिन: अंतरराष्ट्रीय सेमिनार
कार्यक्रम के दूसरे दिन ‘विकसित भारत @ 2047: मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च फॉर इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी एंड इनक्लूसिव डेवलपमेंट’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया।
देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी शिक्षाविद और शोधकर्ता इस सेमिनार में शामिल हुए।
इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सीएमए चित्तरंजन चट्टोपाध्याय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
जापान के ओतारू यूनिवर्सिटी ऑफ कॉमर्स के प्रोफेसर तोमोहिको कोबायाशी और बांग्लादेश की इस्लामिक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरविंद साहा सहित विदेशी वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
इसके अलावा कलकत्ता विश्वविद्यालय, बर्दवान विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के शिक्षाविदों ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।
शोधपत्र और उद्देश्य
सेमिनार का प्रमुख आकर्षण 25 शोधपत्रों की प्रस्तुति रही। चार अलग-अलग क्षेत्रों में प्रस्तुत शोधपत्रों में नवाचार, सतत विकास और समावेशी विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोधकर्ताओं ने अपने विचार और शोध के निष्कर्ष सामने रखे।
प्राचार्या डॉ. मधुमंजरी मंडल ने कहा कि इस दो दिवसीय कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को करियर के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ शोध और बहुआयामी शैक्षणिक गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच तैयार हुआ है।
‘विकसित भारत 2047’ के दीर्घकालिक लक्ष्य को सामने रखते हुए नवाचार, सतत विकास और समावेशी विकास के विषयों पर विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के बीच विचारों का आदान-प्रदान ही इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था।
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