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नशे को ना, जीवन को हाँ – नाट्य प्रस्तुतियों से जागरूकता का संदेश

– नशे के विरुद्ध जागरूकता का सशक्त संदेश दिया वास्तुकला एवं योजना संकाय की नाट्य प्रस्तुतियों ने
– नशा मुक्त अभियान पखवाड़ा के अंतर्गत संकाय के विद्यार्थियों ने तीन समूहों में प्रस्तुत किए जन-जागरूकता आधारित नाटक

लखनऊ। महामहिम कुलाधिपति महोदया के निर्देशों के अनुपालन में राज्य विश्वविद्यालयों एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों में संचालित “नशा मुक्त अभियान पखवाड़ा” के अंतर्गत डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के वास्तुकला एवं योजना संकाय द्वारा शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को अपराह्न 3:00 बजे संकाय परिसर में नशा मुक्ति विषयक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं एवं विद्यार्थियों को समाज में बढ़ते नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें स्वस्थ, सकारात्मक, रचनात्मक एवं नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संकाय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत की गईं तीन प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुतियां रहीं। विद्यार्थियों ने नाटक के माध्यम से नशे की गिरफ्त में फंसते युवा जीवन, व्यक्ति और परिवार पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों तथा नशे के कारण उत्पन्न होने वाली सामाजिक समस्याओं को संवेदनशीलता एवं प्रभावशाली संवादों के साथ मंचित किया।

प्रस्तुतियों में यह भी दर्शाया गया कि नशे की आदत किस प्रकार व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा, करियर, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक जीवन को प्रभावित करती है तथा समय रहते इससे दूर रहना ही स्वस्थ और बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर संकाय की अधिष्ठाता डॉ. वंदना सहगल ने कहा कि, “युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं और उनकी ऊर्जा को सही दिशा देना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। नशा व्यक्ति की प्रतिभा और संभावनाओं को कमजोर करने के साथ-साथ उसके परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है। विद्यार्थियों द्वारा नाट्य कला के माध्यम से नशामुक्ति का संदेश देना अत्यंत सराहनीय पहल है।

कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से दिया गया सामाजिक संदेश अधिक प्रभावी और दूरगामी होता है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थी केवल अकादमिक रूप से ही सक्षम न बनें, बल्कि सामाजिक रूप से जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में भी विकसित हों।”

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विभागाध्यक्ष प्रो. रितु गुलाटी ने कहा कि, “नशामुक्त समाज का निर्माण केवल सरकारी अथवा संस्थागत प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें युवाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। नाटक समाज की वास्तविकताओं को सामने लाने और लोगों को सोचने के लिए प्रेरित करने का सशक्त माध्यम है।

हमारे विद्यार्थियों ने जिस संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ नशे के दुष्परिणामों को मंच पर प्रस्तुत किया, वह उनके सामाजिक सरोकार और रचनात्मक सोच को दर्शाता है। हमें विश्वास है कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को स्वयं नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने आसपास भी जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित करेंगे।”

विद्यार्थियों ने नाट्य कला को जन-जागरूकता के प्रभावी माध्यम के रूप में प्रयोग करते हुए दर्शकों को यह संदेश दिया कि नशा केवल व्यक्ति की व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि परिवार और समाज से जुड़ी एक गंभीर चुनौती है।

प्रस्तुतियों के माध्यम से युवाओं से आह्वान किया गया कि वे नशे से दूर रहकर अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और रचनात्मक क्षमता को शिक्षा, कला, खेल एवं समाजोपयोगी गतिविधियों में लगाएं। नाटकों के माध्यम से “नशे को ना, जीवन को हाँ” का संदेश प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन संकाय की अधिष्ठाता डॉ. वंदना सहगल एवं विभागाध्यक्ष प्रो. रितु गुलाटी के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में किया गया तथा कार्यक्रम के समन्वय का दायित्व कलाकार एवं असिस्टेंट प्रोफेसर, वास्तुकला एवं योजना संकाय, भूपेंद्र कुमार अस्थाना को प्रदान किया गया था।

नाट्य प्रस्तुतियों में संकाय के विभिन्न वर्षों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। तृतीय वर्ष के प्रथम समूह में प्रेक्षा मित्तल, स्नेहा रावत, मीनाक्षी त्रिपाठी, माही सिंह एवं उत्पला अग्निहोत्री ने प्रस्तुति दी।

जबकि तृतीय वर्ष के द्वितीय समूह में शौर्य सक्सेना, अमूल कुमार, वंश विजय शर्मा, अंकिता अग्रवाल, मुकुल सहाय एवं पेशल भट्ट ने प्रतिभाग किया। द्वितीय वर्ष के तीसरे समूह में भारत, फैज़ल, आशुतोष, अहमद, शोएब, अली मेहंदी, शुभम एवं नितीश ने अपनी नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से नशामुक्ति का संदेश दिया।

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नाट्य प्रस्तुतियों के मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञों का निर्णायक मंडल गठित किया गया था, जिसमें नेहा श्रीवास्तव (AKTU), युवा नाट्यकर्मी श्री शुभम तिवारी एवं कला एवं रंगमंच विशेषज्ञ श्री गिरीश पांडेय शामिल रहे।

निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों, विषय-वस्तु, अभिनय, संवाद, निर्देशन, मंचीय प्रभाव तथा नशामुक्ति के संदेश की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया। प्रतियोगिता में नाट्य समूह -2 प्रथम स्थान और समूह -1,3 द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

कार्यक्रम के सफल संचालन में ड्रामा क्लब के छात्र समन्वयक शौर्य सक्सेना एवं अंकिता अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं कार्यक्रम की मीडिया एवं दस्तावेजीकरण टीम में तृतीय वर्ष के विद्यार्थी सरोश रैनन जॉन, ताहा बिन हसन, मान्या वासन एवं मयंक वर्मा शामिल रहे, जिन्होंने कार्यक्रम की गतिविधियों के फोटो एवं वीडियो दस्तावेजीकरण का दायित्व संभाला।

इस कार्यक्रम में संकाय के सभी प्राध्यापक,कर्मचारी और छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नव्या अग्रवाल और अब्दुल कलाम ने किया।

वास्तुकला एवं योजना संकाय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया। नाट्य कला के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी अभिव्यक्ति, संवाद क्षमता और सृजनात्मकता का प्रदर्शन करने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिला।

कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि युवा शक्ति को नशे जैसी विनाशकारी प्रवृत्तियों से बचाकर रचनात्मकता, शिक्षा, कला और सकारात्मक सामाजिक गतिविधियों की ओर प्रेरित करना ही स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण का आधार है।

कार्यक्रम के माध्यम से वास्तुकला एवं योजना संकाय ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि नशामुक्ति केवल किसी अभियान की अवधि तक सीमित विषय नहीं, बल्कि निरंतर सामाजिक जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी का विषय है।

विद्यार्थियों की इन नाट्य प्रस्तुतियों ने न केवल दर्शकों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति संवेदनशील किया, बल्कि उन्हें अपने आसपास नशे के विरुद्ध जागरूकता फैलाने और स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। इस अवसर पर संकाय की ओर से युवा पीढ़ी से “नशे को ना, जीवन को हाँ” का संकल्प लेने का आह्वान किया गया।IMG 20260807 WA0039

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राज कुमार गुप्त पिछले 12+ वर्षों से सब-एडिटिंग और न्यूज़ प्रोडक्शन में काम कर रहे हैं। वे खबरों को सटीक और संतुलित रूप देने में विशेषज्ञ हैं। कोलकाता के स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ है।

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