कोलकाता। महानगर की सृजनशील साहित्यिक संस्था बंगीय हिंदी परिषद् , भारतीय संस्कृति संसद एवं भारतीय विद्या मंदिर के संयुक्त तत्त्वावधान में सारस्वत सम्मान समारोह, हिंदी दिवस एवं नवजागरण दिवस का भव्य आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता महाकवि रामेश्वर नाथ मिश्र अनुरोध ने की। प्रधान अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्वंभर नेवर एवं डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने अपनी गरिमामय उपस्थिति से कार्यक्रम को समृद्ध किया।
उक्त अवसर पर साहित्य, संस्कृति एवं दर्शन से जुड़ी हुई तीन विभूतियों को सम्मानित किया गया। परिषद् द्वारा विशिष्ट उद्योगपति तथा भारतीय संस्कृति के पुरोधा विद्वान डॉ. बिट्ठलदास मूँधड़ा को आचार्य ललिता प्रसाद सुकुल सम्मान से सम्मानित किया गया।
कोलकाता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्य एवं मंजरी पत्रिका की संपादक डॉ. सत्या उपाध्याय को आचार्य विष्णुकांत शास्त्री सम्मान से सम्मानित किया गया तथा विवेकानन्द कॉलेज के दर्शन विभाग की प्राक्तन उपाचार्या डॉ. मधु कपूर को प्रो. रामनाथ तिवारी सम्मान से सम्मानित किया गया।
उक्त अवसर पर डॉ. मूँधड़ा ने परिषद् के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आचार्य ललिता प्रसाद सुकुल के साथ जुड़े हुए अपने संस्मरणों का उल्लेख किया। आपने कहा कि आज मानो साहित्य, संस्कृति एवं दर्शन की त्रिवेणी का संगम हुआ है।
बंगीय हिंदी परिषद्, भारतीय संस्कृति संसद एवं भारतीय विद्या मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में ही यह संयोग घटित हुआ है। आज आवश्यकता इस बात की है कि विविध संस्थाएँ एक साथ मिलकर ऐसे आयोजनों द्वारा समाज को सांस्कृतिक एवं साहित्यिक रूप से समृद्ध करें। आज ऐसे आयोजनों की महती आवश्यकता है।
प्रधान अतिथि नेवर जी ने साहित्य को समाज का सजग प्रहरी बताया और इस बात पर बल दिया कि साहित्यिक समृद्धि ही एक सुसंस्कृत समाज की स्थापना की अनिवार्य शर्त है। डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने अपने गुरु आचार्य विष्णुकांत शास्त्री का स्मरण करते हुए परिषद् के संकल्पों की सराहना की और इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि चयन समिति ने इसबार योग्यतम विभूतियों को सम्मान के लिए चुना है।
परिषद् के अध्यक्ष प्रियंकर पालीवाल ने कहा कि हमारे संसाधन सीमित अवश्य हैं लेकिन हमारे संकल्प बड़े हैं। यह आयोजन इसका प्रमाण है।स्वागत वक्तव्य देते हुए परिषद् के मंत्री डॉ. राजेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने उपस्थित श्रोताओं एवं मंचस्थ विभूतियों को परिषद् के इतिहास और उसके गरिमामय साहित्यिक अवदानों से परिचित कराया।
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए रामेश्वर नाथ मिश्र ने आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया और ऐसे साहित्यिक आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया। ऐसे आयोजनों से समाज समृद्ध होता है और उसे नई दिशा प्राप्त होती है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. दिब्या प्रसाद ने किया।
उक्त अवसर पर जिउत लाल प्रजापति, चन्द्रकिशोर चौधरी, कृष्णकुमार दूबे, ज़ोया अहमद, संदीपा मुखर्जी, अर्नब मंडल, प्रीति सहाय, प्रवेश पटियालवी, आरती भारती, रणजीत भारती, दिनेश प्रसाद सिन्हा, जीतेन्द्र जितांशु, बिश्वजीत सिन्हा, चित्रा राय, अरिमर्दन मिश्र, शिवशंकर सिंह सुमित, लक्ष्मी कुमार जायसवाल, रामनारायण झा, प्रदीप कुमार धानुक, प्रणति ठाकुर, विश्वजीत ठाकुर, सुषमा राय पटेल, पुष्पा मिश्रा, ओमप्रकाश चौबे, अय्यूब वारसी कोलकतवी, नंदलाल रोशन, मनोज मिश्र, चंद्रिका प्रसाद पांडेय अनुरागी,
रामपुकार सिंह गाजीपुरी, सुशीला ओझा, शिप्रा मिश्रा, उर्वशी श्रीवास्तव, प्रणाली श्रीवास्तव, संप्रति श्रीवास्तव, के.एन. मिश्रा, विनोदानंद कुमार, श्यामाचरण, प्रतिभा सिंह, रंजना झा, मानस कुमार, हीरालाल जायसवाल, दुर्गादेवी जायसवाल, संगीता जायसवाल, रीता मुखर्जी, शिवम् तिवारी, शीला संचेती, ज्योत्स्ना दुग्गड़, गजेंद्र नाहटा, मिली दास, आकाश कुमार शर्मा एवं अश्विनी झा ने अपनी गरिमामय उपस्थित से कार्यक्रम को समृद्ध किया।
धन्यवाद ज्ञापन राजगोपाल सुरेका ने किया। सरस्वती वंदना हिमाद्रि मिश्रा में प्रस्तुत किया। प्रबन्धन कमल पुरोहित ने किया।
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