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सफला एकादशी व्रत आज 15 दिसंबर, सोमवार

व्रत मन को संयम सिखाता है और शरीर को नई ऊर्जा देता है

वाराणसी। पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत सन् 2025 ई. में 15 दिसंबर, आज सोमवार को है। इस विषय पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री जी जानकारी देते हुए बताया कि पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 दिसंबर 2025, रविवार को सायं 06 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ होकर 15 दिसंबर, सोमवार को रात्रि 09 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी।

सूर्योदय व्यापिनी एकादशी तिथि 15 दिसंबर, सोमवार को होने के कारण सफला एकादशी का व्रत इसी दिन रखा जाएगा। सफला एकादशी वर्ष 2025 की अंतिम एकादशी है। सफला एकादशी व्रत का पारण 16 दिसंबर, मंगलवार (द्वादशी तिथि) को प्रातः कर सकते हैं।

सामान्यतः एक वर्ष में 24 एकादशी होती हैं, किंतु प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार अधिकमास (मलमास) आने पर इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है।

यह व्रत सभी प्रकार के कष्टों, दुखों और दुर्भाग्य से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर ने भी इस व्रत को किया था। पद्म पुराण के अनुसार, जो भक्तजन सफला एकादशी का व्रत रखते हैं, उनके समस्त पाप उसी प्रकार नष्ट हो जाते हैं जैसे राजा महिष्मान के ज्येष्ठ पुत्र लुम्पक के पाप नष्ट हुए थे।

एकादशी व्रत करने से व्रती को अश्वमेघ यज्ञ, जप, तप तथा तीर्थ-स्नान एवं दान से भी कई गुना अधिक पुण्यफल की प्राप्ति होती है। एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को अपने चित्त, इंद्रियों एवं व्यवहार पर पूर्ण संयम रखना चाहिए।

यह व्रत जीवन में संतुलन बनाए रखने की शिक्षा देता है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति अर्थ एवं काम से ऊपर उठकर धर्म के मार्ग पर अग्रसर होता है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति करता है। यह व्रत पुरुष एवं महिलाएं दोनों कर सकते हैं।

इस दिन किए गए दान से सभी पापों का नाश होता है और परमपद की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं को यथाशक्ति ब्राह्मणों एवं जरूरतमंदों को स्वर्ण, भूमि, फल, वस्त्र, मिष्ठान्न, अन्न, विद्या-दक्षिणा एवं गौदान आदि करना चाहिए।

सफला एकादशी के दिन श्री गणेश जी, श्री लक्ष्मीनारायण एवं देवाधिदेव महादेव की पूजा का भी विशेष महत्व है। श्री लक्ष्मीनारायण जी की कथा एवं आरती अवश्य करें अथवा श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण करें।

एकादशी व्रत का केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत महत्व है। यह व्रत भगवान श्री विष्णु की आराधना को समर्पित होता है। व्रत मन को संयम सिखाता है और शरीर को नई ऊर्जा प्रदान करता है। जो व्यक्ति इस दिन भगवान श्री लक्ष्मीनारायण की पूजा करता है, उसे वैकुंठ की प्राप्ति अवश्य होती है।

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन चावल एवं किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शराब एवं अन्य नशीले पदार्थों से पूर्णतः दूर रहना चाहिए, क्योंकि इसका शरीर ही नहीं, भविष्य पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। इस दिन केवल सात्विक आहार का सेवन करना श्रेयस्कर होता है।

ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848

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