मुंबई, 24 फरवरी 2026: एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक कलाकार की असली पहचान तब बनती है, जब वह अलग-अलग जॉनर में खुद को आजमाने का रिस्क उठाता है। इन दिनों अभिनेत्री संदीपा धर ठीक इसी दोहरे रोल में नजर आ रही हैं।
एक तरफ आने वाला शो ‘चुंबक’ जहां हल्की-फुल्की फैमिली कॉमेडी का मजा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ में उनका किरदार नैना दर्शकों को भावुक कर रहा है।
IANS को दिए इंटरव्यू में संदीपा ने बताया कि इन दोनों प्रोजेक्ट्स ने उन्हें एक्टर के तौर पर अलग-अलग चुनौतियां दीं और दोनों ने उनके अभिनय के अलग-अलग पहलू सामने लाए।

‘चुंबक’ – खोए हुए पड़ोस कल्चर की वापसी
संदीपा ‘चुंबक’ को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने बताया: “यह एक ऐसी फैमिली कॉमेडी है, जिसे हर उम्र का दर्शक साथ बैठकर देख सकता है। आज के दौर में कंटेंट अक्सर बोल्ड होता है, लेकिन ‘चुंबक’ रिश्तों की गर्माहट को महसूस करने की कोशिश करता है।
इसमें कोई भद्दी कॉमेडी या असहज जोक्स नहीं हैं। कहानी पड़ोसियों के इर्द-गिर्द घूमती है – जहां लोग एक-दूसरे के घर बेझिझक आते-जाते हैं, साथ खाना खाते हैं, जिससे रिश्ते अपनेपन वाले बनते थे।”
संदीपा मानती हैं कि आज के समय में पड़ोस का कल्चर लगभग खत्म हो चुका है और यह शो उसी खोए हुए अपनापन को वापस लाने की कोशिश है।
कॉमेडी उनके लिए नया अनुभव रहा। उन्होंने कहा: “कॉमेडी जितनी सहज दिखती है, उतनी होती नहीं। टाइमिंग, रिएक्शन और सिचुएशनल ह्यूमर को पकड़ना आसान नहीं। इसमें रिद्म और सटीकता बेहद जरूरी है।
लेकिन नीना गुप्ता, सुमित राघवन, सुमित व्यास और देवेन भोजानी जैसे अनुभवी कलाकारों के साथ काम करने से बहुत कुछ सीखने को मिला। सेट पर कोई सीनियर-जूनियर नहीं – सब दोस्त जैसे हैं। जैसे-जैसे शूटिंग खत्म होने को है, सबके मन में एक अजीब-सी उदासी है।”
‘दो दीवाने शहर में’ – इमोशनल ब्रेकडाउन की सबसे बड़ी चुनौती
इसके ठीक उलट ‘दो दीवाने शहर में’ में संदीपा का अनुभव भावनात्मक रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण रहा। फिल्म में उन्होंने नैना का किरदार निभाया। स्क्रीन टाइमिंग कम होने के बावजूद उन्होंने कहानी में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी।
संदीपा ने बताया: “इस फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद खास रहा। मेरे सीन कम थे, लेकिन नैना का किरदार बहुत गहराई वाला था। सीमित सीन्स में किसी किरदार की पूरी मानसिक स्थिति दिखाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। नैना बाहर से परफेक्ट दिखती है, लेकिन अंदर से अकेली, उलझी और टूटी हुई है। इस दोहरेपन को पर्दे पर उतारना किसी परीक्षा की तरह था।”
उन्होंने ब्रेकडाउन सीन को सबसे मुश्किल बताया: “ब्रेकडाउन सीन में सिर्फ मैं ही थी और पूरा भावनात्मक बोझ मुझ पर था। मैं ग्लिसरीन नहीं यूज करती, इसलिए हर टेक में असली इमोशंस लाना शारीरिक और मानसिक रूप से थका देने वाला था। मुंबई की पीक समर में शूटिंग करना भी मुश्किलें बढ़ाता था, लेकिन पूरी टीम का साथ मिलने से मुश्किलें भी यादगार बन गईं।”
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