नई दिल्ली, 8 जनवरी 2026: भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने नई दिल्ली में अपने स्पोर्ट्स साइंस डिवीजन में कॉम्बैट स्पोर्ट्स कोचों के लिए चार दिवसीय स्पोर्ट्स साइंस वर्कशॉप का आयोजन शुरू किया है।
इस वर्कशॉप में बॉक्सिंग, कुश्ती और जूडो जैसे प्रमुख कॉम्बैट स्पोर्ट्स के साई कोच हिस्सा ले रहे हैं। इस इमर्सिव और हैंड्स-ऑन प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य दैनिक कोचिंग में स्पोर्ट्स साइंस के एकीकरण को मजबूत करना है।
कोचों को फंक्शनल स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, प्लायोमेट्रिक्स, पीरियोडाइज्ड रेजिस्टेंस ट्रेनिंग और एलीट प्रदर्शन के लिए प्रासंगिक व्यायाम शरीर विज्ञान के सिद्धांतों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। विशेष जोर कॉम्बैट स्पोर्ट्स के लिए अनुकूलित शक्ति और कंडीशनिंग मॉडल पर दिया जा रहा है।

साई स्पोर्ट्स साइंस डिवीजन के प्रमुख का बयान
साई स्पोर्ट्स साइंस डिवीजन के निदेशक-सह-प्रमुख ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक ने कहा: “केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और सचिव (खेल) ने लगातार स्पोर्ट्स साइंस में कोचों को प्रोत्साहित करने की जरूरत पर जोर दिया है।
स्पोर्ट्स साइंटिस्ट द्वारा समर्थित कोचों के साथ इस तरह का केंद्रित जुड़ाव भारत की पदक संभावनाओं में सकारात्मक योगदान देगा। हमारा दृष्टिकोण एथलीट-केंद्रित, कोच-नेतृत्व वाला और स्पोर्ट्स साइंस द्वारा समर्थित है।”
उद्घाटन सत्र में प्रो. दीपक जोशी का संबोधन
वर्कशॉप के उद्घाटन सत्र को वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (एसआईसी) के निदेशक प्रो. (डॉ.) दीपक जोशी ने संबोधित किया।
उन्होंने कहा: “यह सहकार्यता भारत के स्पोर्ट्स इकोसिस्टम के लिए एक वरदान साबित होगी। साई की ओर से रेफर किए गए एथलीट्स को प्रायोरिटी ट्रीटमेंट, लगातार क्लिनिकल मैनेजमेंट और ट्रेनिंग एवं कॉम्पिटिशन में वापस लौटने का एक आसान रास्ता मिलेगा।”
SAI और SIC के बीच ऐतिहासिक MOU की तैयारी
वर्कशॉप के दौरान साई और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल के स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (एसआईसी) के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) पर साइन करने की तैयारी है।
- एसआईसी एडवांस्ड स्पोर्ट्स मेडिसिन और सर्जिकल इंटरवेंशन संभालेगा।
- साई एप्लाइड स्पोर्ट्स साइंस रिहैबिलिटेशन और रिटर्न-टू-प्ले प्रोटोकॉल मैनेज करेगा। यह सहयोग भारतीय एथलीट्स को प्रायोरिटी केयर और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगा।
इससे भारतीय एथलीट्स को प्राथमिकता के आधार पर उपचार और सुरक्षित प्रतिस्पर्धात्मक वापसी सुनिश्चित की जा सकेगी।
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