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ऋत्विक घटक इतिहास चेतना के एक महान शिक्षक और दार्शनिक थे – संजय मुखोपाध्याय

कोलकाता। पश्चिम बंग हिंदी भाषी समाज द्वारा आयोजित ऋत्विक घटक जन्मशती समारोह का उद्घाटन प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक कमलेश्वर मुखर्जी ने किया। कमलेश्वर मुखर्जी ने ऋत्विक घटक के व्यक्तित्व और कृतित्व पर उनकी ही फिल्म के नाम पर ‘मेघे ढाका तारा’ फिल्म निर्देशित की है। राममोहन हाल कोलकाता में उद्घाटन करते हुए कमलेश्वर मुखर्जी ने कहा कि ऋत्विक घटक के सिनेमा के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी प्रोफेसर संजय मुखोपाध्याय के लेखन और भाषणों से मिली है।

ऋत्विक घटक स्थानीय से लेकर अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं पर विचार करते समय सिनेमा के निर्देशक से आगे बढ़ते हुए दार्शनिक लगते हैं। हमारे यथार्थ के बाहर एक दुनिया है, उसे स्पर्श करने का काम ऋत्विक घटक ने किया है। आज जब देश के अंदर जनसंख्या के एक हिस्से को बाहरी बताया जा रहा है या देश के बाहर भेजने की बात की जा रही है, तब इसके खिलाफ ऋत्विक घटक पथ-प्रदर्शक का काम करते हैं। वे हमारे रोल मॉडल बन जाते हैं।

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जादवपुर विश्वविद्यालय के फिल्म स्टडीज विभाग के पूर्व प्रोफेसर संजय मुखोपाध्याय ने कहा कि ऋत्विक घटक को श्रद्धांजलि देने का सबसे अच्छा तरीका है उनकी फिल्मों को फिर से देखना। भारत की उपजातियों पर सबसे पहली डाक्यूमेंट्री फिल्म ऋत्विक घटक ने बनायी थी, जिसका नाम था “बिहार के आदिवासियों का जीवन”। ऋत्विक घटक इतिहास चेतना के एक महान शिक्षक और दार्शनिक थे।

पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में वाइस प्रिंसिपल रहते समय ऋत्विक घटक प्रिंसिपल ला कालेज रोड से गुजर रहे थे, तभी रास्ते में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के पहले सचिव पूरन चंद्र जोशी ने उन्हें गले से लगा लिया था। उसी दिन रात में ऋत्विक घटक ने पत्नी को पत्र में लिखा – “आज पी.सी. जोशी ने कहा – तुम भारत के अकेले जनता के कलाकार हो, इससे बड़ा पुरस्कार और क्या हो सकता है।”

संजय मुखोपाध्याय ने कहा कि ‘सुवर्णरेखा’ फिल्म में विचारों का ऐश्वर्य है। फिल्म के शुरू और अंत में ‘हे! राम’ की आवाज गूँजती है। गाँधीजी की हत्या को इन्होंने फिल्म में जोड़ दिया है। अगर आज ‘सुवर्णरेखा ‘फिल्म बनती तो सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट नहीं मिलता। ऋत्विक घटक मानते थे कि रामायण महाकाव्य के नायक राम ही इस देश के नायक हैं। ऋत्विक घटक ने ‘सुवर्णरेखा ‘में राम को देश के सत्तर प्रतिशत शोषित पीड़ित और वंचित जनसंख्या का नायक बना दिया।

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पश्चिम बंग हिंदी भाषी समाज के प्रधान संरक्षक पूर्व सांसद मोहम्मद सलीम ने कहा कि ऋत्विक घटक की जन्मशती पर यह कार्यक्रम बहुत जरूरी था। एकता और सद्भाव के लिए अलग-अलग भाषाओं के लोगों से मिलने के लिए सांस्कृतिक पुल बनाना जरूरी है। पश्चिम बंगाल में बांग्ला भाषियों के साथ पश्चिम बंग हिंदी भाषी समाज सांस्कृतिक पुल बनाने का काम कर रहा है।

फिल्म एक ऐसा माध्यम है जो भाषा से परे है। ऋत्विक घटक की फिल्म ‘सुवर्णरेखा’ दक्षिण एशिया की महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक है। ऋत्विक घटक सिनेमा के माध्यम और जिस दर्शन में वे विश्वास करते थे, उसके साथ सच्चाई के साथ जिम्मेदारी निभायी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ऋत्विक घटक की फिल्मों की विशेषज्ञ प्रोफेसर संचिता सान्याल ने ऋत्विक घटक की अंतिम फिल्म ‘जुक्ति तक्को आर गप्पो’ पर विस्तार से विचार करते हुए कहा कि ऋत्विक घटक ने खुद को ब्रोकेन इंटेलुक्चुअल कहा है। असली बुद्धिजीवी उस जनता का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता है।

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संचालन करते हुए साहित्य और संस्कृति उप समिति के अध्यक्ष केशव भट्टड़ ने कहा कि ‘सुवर्णरेखा’ फिल्म की कहानी ऋत्विक घटक और राधेश्याम झुनझुनवाला ने लिखी थी। बांग्ला और हिंदी के बीच फिर से सांस्कृतिक सेतु को मजबूत करना हमारा लक्ष्य है। श्रीप्रकाश जायसवाल ने आभार व्यक्त किया।

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