कोलकाता हिन्दी न्यूज | 30 जुलाई 2026: आरजी कर मेडिकल कॉलेज की युवा महिला डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या मामले की जांच में बड़ा बदलाव किया गया है। पीड़िता के माता-पिता की मांग को देखते हुए जांच अधिकारी सीमा पाहुजा को हटाने का फैसला लिया गया है। उनकी जगह अब संदीपनी गर्ग को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गुरुवार को इस मामले में जांच की 12वीं स्टेटस रिपोर्ट शियालदह अदालत में पेश की गई।
केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) की ओर से अदालत को बताया गया कि कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश के बाद नए सिरे से गठित विशेष जांच दल (SIT) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। सीबीआई के अधिवक्ता पार्थसारथी दत्त ने अदालत में इसकी जानकारी दी।
वहीं, पीड़िता के माता-पिता की ओर से पेश अधिवक्ता अमर्त्य दे और राजदीप हलदार ने आरोप लगाया कि पहले जिन अधिकारियों के हाथ में जांच थी, वे मामले की तह तक पहुंचने में सफल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि अब यह देखना होगा कि नई SIT किस दिशा में जांच आगे बढ़ाती है।
8 अगस्त 2024 की रात हुई थी वारदात
आरजी कर मेडिकल कॉलेज की युवा डॉक्टर 8 अगस्त 2024 को नाइट शिफ्ट के लिए अस्पताल पहुंची थीं। उसी रात अस्पताल के सेमिनार हॉल में उनके साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना हुई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
मामले की शुरुआती जांच कोलकाता पुलिस ने की थी। पुलिस ने सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
सीबीआई की जांच के दौरान इस मामले में संजय रॉय के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हुई। बाद में शियालदह अदालत ने संजय रॉय को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
हालांकि, पीड़िता के माता-पिता जांच से संतुष्ट नहीं हैं। उनका आरोप है कि घटना में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं और अब तक उनकी भूमिका की पूरी तरह जांच नहीं हुई है।
हाई कोर्ट के निर्देश पर बनी नई SIT
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद आरजी कर मामले की जांच को लेकर एक बार फिर सक्रियता बढ़ी है। मामले से जुड़े पुराने अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। तत्कालीन पुलिस आयुक्त विनीत गोयल, तत्कालीन डीसी सेंट्रल इंदिरा मुखर्जी और तत्कालीन डीसी नॉर्थ अभिषेक गुप्ता को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि तत्कालीन सरकार के किसी मंत्री या मुख्यमंत्री की ओर से अधिकारियों को फोन, संदेश अथवा किसी अन्य माध्यम से कोई निर्देश दिया गया था या नहीं। यदि ऐसा कोई तथ्य सामने आता है तो उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जा सकती है।
इसी बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने सीबीआई के पूर्वी क्षेत्र के संयुक्त निदेशक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय SIT गठित करने का निर्देश दिया था। अदालत के निर्देश के बाद नई SIT ने जांच शुरू कर दी है।
अब जांच अधिकारी के बदलाव के बाद मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सभी की नजरें हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को प्रस्तावित है। उस दिन जांच एजेंसी की ओर से एक और स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश किए जाने की संभावना है।
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