Clean energy goals

Climate कहानी || रिन्यूएबल्स ने नहीं बढ़ाया बिजली बिल, डर की राजनीति पर डेटा भारी

निशान्त, Climate कहानी, कोलकाता : हवा और सूरज से बनने वाली बिजली को लेकर एक आम दलील है कि यह भरोसेमंद नहीं है, बैकअप महंगा पड़ता है और आखिरकार बिजली बिल बढ़ जाता है। लेकिन दिसंबर 2025 में जारी जीरो कार्बन एनालिटिक्स की नई रिपोर्ट इन दावों को आंकड़ों से खारिज कर रही है।

रिपोर्ट के लेखक ऊर्जा विश्लेषक निक हेडली ने अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और भारत के वास्तविक बिजली बाजार डेटा का अध्ययन किया है, और निष्कर्ष साफ है – जहां बड़े पैमाने पर पवन और सौर ऊर्जा अपनाई गई, वहां बिजली की कीमतें औसत से कम रही हैं।

रिपोर्ट की शुरुआत ही इस मिथक को परखने से होती है कि क्या रिन्यूएबल्स बिजली को महंगा बनाते हैं। जवाब है – नहीं। बल्कि कई मामलों में उलटा सच साबित हुआ है।

The sun of renewable energy has risen in the energy sector; the 'Surya Ghar Yojana' has accelerated the pace, but the road remains long.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सस्ती रिन्यूएबल्स

इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA) के अनुसार, आज नई बिजली उत्पादन क्षमता में सबसे सस्ता विकल्प ऑनशोर विंड है, उसके बाद सोलर फोटोवोल्टिक (PV)। 2024 में ग्रिड से जुड़ी 10 में से 9 नई रिन्यूएबल परियोजनाएं सबसे सस्ती नई जीवाश्म ईंधन बिजली से भी कम लागत पर बिजली दे रही थीं।

अमेरिका: ज्यादा रिन्यूएबल्स, कम बिल

अमेरिकी राज्यों में जहां पवन और सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी औसत से ज्यादा है, घरेलू बिजली दरें राष्ट्रीय औसत से कम हैं। 2025 के पहले 9 महीनों में:

  • आयोवा, साउथ डकोटा और न्यू मैक्सिको (जहां 50% से ज्यादा बिजली हवा-सूरज से) – कीमतें राष्ट्रीय औसत से नीचे।
  • अपवाद जैसे कैलिफोर्निया और हवाई में ऊंची कीमतें रिन्यूएबल्स से नहीं, बल्कि जंगल की आग से जुड़ी लागत, ग्रिड अपग्रेड और आयातित ईंधन पर निर्भरता से हैं।

Government support needed for clean energy goals: Report

यूरोप: स्पेन-डेनमार्क में कम दाम

  • स्पेन में 2025 की पहली छमाही में बिजली दाम यूरोपीय औसत से 32% कम।
  • वजह: गैस और कोयला अब दाम तय करने में कम भूमिका निभाते हैं।
  • IEA अनुमान: 2021-2023 में नई सोलर-विंड क्षमता ने यूरोपीय उपभोक्ताओं को 100 अरब यूरो की बचत कराई।

भारत: संकेत सकारात्मक

भारत में अभी 75% बिजली कोयले से आती है, इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर सीधा रिश्ता दिखना मुश्किल। लेकिन जहां रिन्यूएबल्स तेजी से बढ़ रही हैं:

  • राजस्थान में डिस्कॉम्स की औसत बिजली खरीद कीमत राष्ट्रीय स्तर से कम।
  • मध्य प्रदेश पर अध्ययन: रिन्यूएबल्स हिस्सेदारी बढ़ने से खरीद लागत 11% तक घट सकती है।

ऑस्ट्रेलिया: मिश्रित लेकिन उम्मीद जगाने वाली तस्वीर

साउथ ऑस्ट्रेलिया में कीमतें ऊंची रहीं, लेकिन समस्या रिन्यूएबल्स से पहले की – बाजार संरचना और ट्रांसमिशन सीमाओं से। दिलचस्प: जब 85% बिजली हवा-सूरज से आती है, थोक कीमतें शून्य से नीचे चली जाती हैं।

Energy transition i

रिपोर्ट का निष्कर्ष

बिजली दाम कई कारकों से तय होते हैं – टैक्स, ग्रिड लागत, ईंधन आयात, बाजार नियम। लेकिन “रिन्यूएबल्स बिजली महंगी बनाते हैं” का दावा आंकड़ों से साबित नहीं होता। जहां विंड, सोलर और बैटरी स्टोरेज तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां उपभोक्ताओं को महंगी गैस-कोयले की मार से राहत मिली है।

निक हेडली लिखते हैं: “विंड, सोलर और बैटरी की लागत गिरती जा रही है। देशों के पास सस्ती, स्थिर और झटकों से सुरक्षित बिजली व्यवस्था बनाने का मौका है – बशर्ते नीतियां इस बदलाव को थामें नहीं, बढ़ाएं।”

सवाल अब यह नहीं कि रिन्यूएबल्स महंगी है या नहीं। सवाल यह है – क्या हम महंगे जीवाश्म ईंधन पर टिके रहना चाहते हैं, या सस्ती-साफ ऊर्जा की ओर बढ़ना चाहते हैं? डेटा अपनी बात साफ कह चुका है।

Wind Energy Solar

इस रिपोर्ट पर आपकी राय क्या है? कमेंट में बताएं – रिन्यूएबल्स से बिजली बिल कम होगा?

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

fifteen − seven =