निशान्त, Climate कहानी, कोलकाता: दुनिया भर में हवा और सूरज से बिजली बनाने की रफ्तार पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ हो गई है, लेकिन इस हरित ऊर्जा क्रांति की अगुवाई अब अमीर देशों के हाथ में नहीं रह गई है।
ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि रिन्यूएबल एनर्जी में सबसे तेज़ बढ़त अब उभरती अर्थव्यवस्थाओं—खासतौर पर चीन, भारत और ब्राज़ील—से आ रही है।
वैश्विक रिन्यूएबल पाइपलाइन 4.9 टेरावॉट पर
ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर (GEM) की Global Wind and Solar 2025 Outlook रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक दुनिया भर में पवन और यूटिलिटी-स्केल सोलर परियोजनाओं की कुल पाइपलाइन रिकॉर्ड 4.9 टेरावॉट तक पहुंच चुकी है। यह पिछले साल की तुलना में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कागज़ पर प्रस्तावित योजनाओं से लेकर ज़मीन पर चल रहे प्रोजेक्ट्स तक, रिन्यूएबल एनर्जी का विस्तार लगातार जारी है। हालांकि, इस विस्तार का भूगोल तेजी से बदल रहा है।
चीन सबसे आगे, दुनिया की आधी क्षमता अकेले निर्माणाधीन
GEM के आंकड़ों के अनुसार, अकेले चीन में 448 गीगावॉट पवन और सोलर क्षमता इस समय निर्माणाधीन है, जो दुनिया भर के कुल निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स का करीब आधा हिस्सा है।
2025 में चीन की कुल ऑपरेशनल पवन और सोलर क्षमता 1.6 टेरावॉट से आगे निकल चुकी है। यह क्षमता अमेरिका और भारत की संयुक्त क्षमता से लगभग तीन गुना बताई जा रही है।
भारत और ब्राज़ील भी नई ऊर्जा भूगोल के अहम खिलाड़ी
इस बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत भी तेज़ी से उभर रहा है। GEM के मुताबिक,
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भारत के पास 234 गीगावॉट की प्रस्तावित पवन और यूटिलिटी-स्केल सोलर क्षमता है
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ब्राज़ील के पास 401 गीगावॉट
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फिलीपींस के पास 146 गीगावॉट की प्रस्तावित क्षमता है
ये आंकड़े बताते हैं कि रिन्यूएबल एनर्जी का नेतृत्व अब पारंपरिक औद्योगिक देशों से खिसककर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर जा रहा है।
अमीर देशों पर उठते सवाल
इसके उलट, दुनिया की सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। G7 देशों, जिनके पास दुनिया की लगभग आधी संपत्ति है, उनके हिस्से में वैश्विक पवन और सोलर पाइपलाइन का सिर्फ 11 प्रतिशत आता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2023 के बाद से G7 देशों की कुल प्रस्तावित रिन्यूएबल क्षमता लगभग 520 गीगावॉट पर ही ठहरी हुई है। यह अंतर साफ तौर पर जलवायु लक्ष्यों और ज़मीनी अमल के बीच बढ़ती खाई को उजागर करता है।
“नेतृत्व अब फॉलोअर्स के हाथ में”
GEM की रिसर्च एनालिस्ट डिरेन कोचाकुशाक कहती हैं, “पवन और सोलर अभूतपूर्व गति से बढ़ रहे हैं, और यह गति अब उन देशों से आ रही है जिन्हें कभी ऊर्जा क्षेत्र में फॉलोअर माना जाता था। असली सवाल यह है कि क्या अमीर देश अपने वादों और अमल के बीच की दूरी पाट पाएंगे, या फिर इस उभरते सेक्टर में नेतृत्व छोड़ देंगे।”
डिस्ट्रिब्यूटेड सोलर बन रहा ऊर्जा संक्रमण की रीढ़
रिपोर्ट एक और बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है। डिस्ट्रिब्यूटेड सोलर—यानी रूफटॉप और छोटे पैमाने की सोलर परियोजनाएं—अब ऊर्जा संक्रमण की रीढ़ बनती जा रही हैं।
GEM के Global Solar Power Tracker के अनुसार,
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दुनिया भर में करीब 900 गीगावॉट डिस्ट्रिब्यूटेड सोलर क्षमता पहले से चालू है
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अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि मौजूदा और प्रस्तावित सोलर क्षमता का 42 प्रतिशत हिस्सा इसी श्रेणी में आता है
इस क्षेत्र में भी चीन, भारत और ब्राज़ील शीर्ष देशों में शामिल हैं।
तकनीक नहीं, नेतृत्व की लड़ाई
कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि रिन्यूएबल एनर्जी का भविष्य अब सिर्फ तकनीक या निवेश की कहानी नहीं रह गया है। यह राजनीतिक इच्छाशक्ति, नीति प्राथमिकताओं और वैश्विक नेतृत्व की लड़ाई बन चुका है।
दुनिया सोलर और पवन के रास्ते पर तेज़ी से आगे बढ़ रही है— लेकिन बड़ा सवाल यही है कि इस दौड़ की दिशा तय कौन करेगा?
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