कोलकाता । कलकत्ता हाईकोर्ट ने साल 2012 में हुए पार्क स्ट्रीट दुष्कर्म कांड की पीड़िता का रिकॉर्ड किया गया बयान सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुये यह आदेश सुनाया कि दुष्कर्म पीड़िता का रिकॉर्ड किया गया बयान मुख्य आरोपी के खिलाफ सबूत के रूप में इस्तेमाल नहीं होगा। दुष्कर्म पीड़िता की साल 2015 में मौत हो गई थी। जस्टिस जयमाला बागची और जस्टिस विश्वास पटनायक की खंडपीठ ने कहा कि सरकारी वकील ने इस मामले में अलग आवेदन दायर नहीं किया और मुख्य आरोपी के वकील को बयान के संबंध में पूछताछ का मौका नहीं मिला इसी कारण इसे सबूत के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

गौरतलब है कि छह फरवरी 2012 को चलती गाड़ी में पांच लोगों सुमित बजाज, नासिर खान, रुमान खान, कादर खान और अली खान ने पीड़िता के सामूहिक दुष्कर्म किया था। पीड़िता ने जब पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई तो राज्य प्रशासन ने भी इसे झूठा मामला करार दिया।

हालांकि, उस वक्त कोलकाता पुलिस के खुफिया विभाग में उपायुक्त रही दमयंती सेन ने मामले को अपने हाथ में लिया और उन्हीं के कारण यह मामला सुलझ पाया। निचली अदालत ने जांच अधिकारियों को कादर खान के खिलाफ पीड़िता के दर्ज बयान को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने का आदेश दिया। कादर खान के वकील ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की, जहां दुष्कर्म के आरोपी को राहत मिली। फरार दोनों आरोपी भी सितंबर 2016 में गिरफ्तार कर लिये गये थे।

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