बंगाल BJP में बगावत तेज, केन्द्रीय मंत्री समेत कई बड़े नेता छोड़ सकते हैं पार्टी!

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इकाई में गुटबाजी उभर कर सामने आ गई है और राज्य भाजपा नेताओं ने केन्द्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर और अन्य नेताओं के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के मामले में केन्द्रीय नेतृत्व को अवगत कराया है। इस मामले में राज्य के 10 विद्रोही नेताओं को जिम्मेदार ठहराया गया है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि भाजपा प्रदेश महासचिव (संगठन) अमिताभ चक्रवर्ती ने केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष 10 बागी नेताओं के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और पार्टी के बुनियादी प्रोटोकॉल तथा अनुशासन को तोड़ने की शिकायत दर्ज कराई है। सूत्रों ने यह भी कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने भी राज्य इकाई को आश्वासन दिया कि मामले को पूरी गंभीरता से लिया जाएगा। मामले ने उस समय तूल पकडा़ जब शहर चक्रवर्ती के खिलाफ पोस्टर और होर्डिंग्स से भर गया था, जिसे कथित तौर पर विद्रोही पार्टी के नेताओं ने अंजाम दिया था। चक्रवर्ती ने ऐसे होर्डिंग्स और पोस्टरों की तस्वीरें पार्टी आलाकमान को भेज कर मामले की जानकारी दी है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर आईएएनएस को बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष सहित केंद्रीय नेतृत्व इस समय सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों में व्यस्त है। बंगाल में चल रहे विवाद को संभालने के उनके लिए यह अभी संभव नहीं होगा। उन्होंने चुनाव खत्म होने के बाद इस मामले को उठाने का आश्वासन दिया है। दरअसल शनिवार (15 जनवरी) को केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर राज्य के असंतुष्ट भाजपा नेताओं के साथ बैठक में शामिल हुए थे जिनमें असंतुष्ट विधायक सुब्रत ठाकुर और अशोक कीर्तनिया और सायंतन बसु शामिल हैं। बसु से हाल ही महासचिव पद छीन लिया गया है।

पार्टी सूत्रों ने कहा कि जय प्रकाश मजूमदार – बंगाल भाजपा के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और पार्टी की राज्य इकाई के उपाध्यक्ष से प्रवक्ता बनाकर एक तरह से उन्हें पदावनत करने जैसा है। ये सभी नेता भी बैठक में उपस्थित थे। इनके अलावा प्रदेश भाजपा के तीन प्रमुख नेता रितेश तिवारी, तुषार मुखोपाध्याय और देबाशीष मित्रा भी बैठक में शामिल हुए। पार्टी में गुटबाजी और आक्रोश तब तेज हुआ जब कई सदस्यों ने भाजपा के व्हाट्सएप ग्रुप को छोड़ दिया। भाजपा नेताओं का पलायन उस समय शुरू हुआ जब अखिल भारतीय मटुआ महासंघ (एआईएमएमएस) द्वारा भाजपा से दूरी बनाने जाने तथा राजनीतिक रूप से तटस्थ रहने की घोषणा से ठीक एक दिन पहले मतुआ समुदाय के इन पांच विधायकों ने पार्टी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ दिया।

हाल ही में पुनर्गठित पार्टी की राज्य और जिला समितियों में मतुआ नेताओं के प्रतिनिधित्व की कमी से शांतनु बहुत दुखी हैं। उन्होंने पहले कहा था, मैं व्हाट्सएप समूहों को छोड़ने पर टिप्पणी करना पसंद नहीं करूंगा। सही समय पर अपने कार्यों और भविष्य की योजनाओं का खुलासा करूंगा। उन्होंने कहा कि हमने सब कुछ विस्तार से बता दिया है और अब फैसला करना केंद्रीय नेतृत्व पर निर्भर है। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सार्वजनिक रूप से पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि अब उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे आम तौर पर लोगों और हमारे कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाएगा और पार्टी की इस अंदरूनी कलह का अंत होना चाहिए।

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