कोलकाता हिन्दी न्यूज | 29 जुलाई 2026: नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में शुक्रवार को वामपंथी छात्र संगठनों की ओर से आयोजित प्रदर्शन के बाद अब एक वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
आरोप है कि रांची के एक वीडियो को कोलकाता के मौलाली का बताकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। वीडियो की वास्तविक लोकेशन सामने आने के बाद राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने वामपंथी संगठनों पर निशाना साधा है।
दिलीप घोष ने कथित तौर पर फर्जी वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और कार्रवाई की जाएगी।
इसी बीच सृजन भट्टाचार्य, देवांजन डे समेत तीन लोगों के खिलाफ लालबाजार में शिकायत दर्ज कराई गई है।
क्या है पूरा मामला?
नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में शुक्रवार को वामपंथी छात्र संगठनों के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे थे। प्रदर्शन के दौरान धर्मतला इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। इस दौरान कुछ पत्रकारों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबर सामने आई थी।
इसी प्रदर्शन के बाद वामपंथी खेमे की ओर से सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया गया। वीडियो में कथित तौर पर भाजपा का झंडा लगी एक गाड़ी के ऊपर खड़े कुछ युवकों को प्रदर्शनकारियों की ओर टमाटर और ईंटें फेंकते हुए देखा गया।
वीडियो शेयर करते हुए दावा किया गया था कि यह घटना कोलकाता के मौलाली इलाके की है।
बाद में फैक्ट-चेक के दौरान सामने आया कि वीडियो मौलाली का नहीं, बल्कि रांची का बताया जा रहा है। इसके बाद इस वीडियो को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई।
दिलीप घोष ने साधा निशाना
मामला सामने आने के बाद मंत्री दिलीप घोष ने वामपंथियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग कथित तौर पर फर्जी वीडियो फैलाकर बंगाल को बदनाम कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
दिलीप घोष ने कहा, “जो लोग फर्जी वीडियो फैला रहे हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। किया भी जाएगा।”
उन्होंने इस तरह के वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
सृजन समेत तीन के खिलाफ शिकायत
वीडियो विवाद के बाद बुधवार को सृजन भट्टाचार्य, देवांजन डे समेत तीन लोगों के खिलाफ लालबाजार में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग और गहरा कर लिया है।
अब पुलिस इस बात की जांच करेगी कि वीडियो को किसने साझा किया, उसके साथ क्या दावा किया गया और क्या जानबूझकर गलत लोकेशन बताकर इसे प्रसारित किया गया था।
सृजन भट्टाचार्य ने दी सफाई
वहीं, वामपंथी नेता सृजन भट्टाचार्य ने इस पूरे विवाद पर अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि बाद में फैक्ट-चेक के जरिए उन्हें पता चला कि वीडियो मौलाली का नहीं है।
हालांकि, उन्होंने साथ ही दावा किया कि वीडियो में दिखाई गई घटना वास्तविक है। उनके मुताबिक, वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों ने प्रदर्शनकारियों की ओर टमाटर और ईंटें फेंकी थीं।
सृजन भट्टाचार्य ने कहा कि वीडियो की जगह भले ही मौलाली नहीं हो, लेकिन जिस घटना को वीडियो में दिखाया गया है, वह हुई है और वह जहां भी हुई हो, निंदनीय है।
अब जांच का मुद्दा क्या है?
अब इस विवाद में मुख्य सवाल यह है कि वीडियो को सबसे पहले किसने साझा किया और उसे मौलाली का बताने के पीछे क्या वजह थी। पुलिस शिकायत के बाद सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो के मूल स्रोत और उसके प्रसार की पूरी कड़ी की जांच की जा सकती है।
साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि वीडियो को गलत लोकेशन के साथ जानबूझकर साझा किया गया था या यह किसी गलती का परिणाम था।
फिलहाल, वीडियो को लेकर शुरू हुआ विवाद आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।

