राजीव कुमार झा की कविता : सपनों की रानी

।।सपनों की रानी।।
राजीव कुमार झा

ग्रीष्म के
तपते मौसम में
सबसे बनी सयानी
तुम्हारी जिंदगी
प्यार का मीठा
अनमोल बरसता
ठंडा पानी
तुम सबको सबसे
खूबसूरत लगती
प्यार पाकर
हरी भरी धरती सी
हंसती
उस दिन बादल
खूब गरजते
बारिश के बाद
ठंडी हवा को
बांहों में भरकर
प्यार के मैदान में
घूमने निकलते
गर्मी के मौसम में
घर लौटते
देर रात हो जाती
मधुमालती की
झुरमुट के पास
तुम ठहर जाती
कृत्रिम रोशनी में
बेंच पर बैठ कर
प्यार के गीत गाती

राजीव कुमार झा, कवि/ समीक्षक

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