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पुरुलिया : सामान्य शिक्षा की रक्षा का संकल्प – एबीटा पुरुलिया जिला का ग्यारहवां त्रैवार्षिक सम्मेलन संपन्न

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। शिक्षा जगत की आवाज एक बार फिर पुरुलिया ज़िले के पाड़ा क्षेत्र में गूंज उठी, जब अखिल बंग विद्यालय शिक्षक समिति (एबीटा) का ग्यारहवां त्रैवार्षिक जिला सम्मेलन पाड़ा कम्युनिटी हॉल में भव्य तरीके से संपन्न हुआ। जिले के विभिन्न ब्लॉक और अंचलों से करीब 250 से अधिक प्रतिनिधि इस सम्मेलन में शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत बाज़ार इलाके में शिक्षकों की रंग-बिरंगी और अनुशासित रैली से हुई। शिक्षकों ने “सामान्य शिक्षा की रक्षा करो” के नारों के साथ शिक्षा को जनाधिकार के रूप में बनाए रखने का संदेश दिया। यह रैली क्षेत्र के लोगों में उत्साह और जागरूकता फैलाने का माध्यम भी बनी।

सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन एबीटीए के मुखपत्र “शिक्षा ओ साहित्य” के संपादक राणा भट्टाचार्य ने किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि समाज की दिशा तय करने वाला स्तंभ है।

इसलिए शिक्षकों की भूमिका पहले से कहीं अधिक गंभीर और ज़िम्मेदार है।इसके बाद समित‍ि के ज़िला अध्यक्ष प्रदीप चौधरी ने संगठन का ध्वज फहराया और पूरे ज़िले में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शिक्षकों से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया।

सम्मेलन की अध्यक्षता प्रदीप चौधरी, मल्लिका सान्याल, प्रणब नियोगी और हरप्रसाद पात्र से बनी सभापतिमंडली ने की। जिला सचिव व्योमकेश दास ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें शिक्षकों की वर्तमान समस्याओं, विद्यालयों में रिक्त पदों, और शिक्षा के ढांचे को मज़बूत करने पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। इस रिपोर्ट पर 17 प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे।

उन सभी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षकों की नियुक्ति पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिले। साथ ही बंद पड़े छात्रावासों को पुनः खोलने, प्रत्येक विद्यालय को पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रांट और सौ प्रतिशत कॉम्पोज़िट ग्रांट देने की भी एकजुट मांग उठाई गई।

सम्मेलन में ज़िला स्तर पर विभिन्न ज़ोन और शाखाओं से आए शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता दिखाई। प्राथमिक शिक्षक, उच्च प्राथमिक अनुदेशक, जूनियर हाई, उच्च माध्यमिक शिक्षक-शिक्षिकाएं, एमएसके, पार्श्व शिक्षक, संविदा और आईसीटी शिक्षक सभी वर्गों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने सम्मेलन को जीवंत बना दिया।

कार्यक्रम में गणतांत्रिक आंदोलनों के वरिष्ठ नेता प्रदीप राय और स्वागत समिति के अध्यक्ष सुब्रत बनर्जी ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी सरकार या संस्था की संपत्ति नहीं, बल्कि जनसामान्य का अधिकार है।

इसलिए शिक्षकों का संघर्ष, लोकतंत्र और समान अवसर की लड़ाई से जुड़ा हुआ है। सम्मेलन के समापन सत्र में 57 सदस्यीय नई जिला परिषद का गठन किया गया, जो अगले तीन वर्षों तक संगठन के कार्यों का संचालन करेगी। साथ ही आगामी राज्य सम्मेलन के लिए 23 प्रतिनिधियों का चयन भी हुआ।

पूरा समारोह शिक्षा, समानता और अधिकार के मूल आदर्शों को समर्पित रहा। सम्मेलन का संदेश साफ था कि “शिक्षा की मजबूती ही समाज के भविष्य की गारंटी है।”

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