कोलाघाट (पश्चिम बंगाल) | 1 दिसंबर 2025 : पूर्व मेदिनीपुर जिले में कोलाघाट पंचायत समिति द्वारा बोरों खेती में ज्वार का पानी उपयोग न करने के हालिया निर्णय ने किसानों में असंतोष की लहर पैदा कर दी है।
समिति ने बीडीओ कार्यालय में हुई बैठक में साफ कर दिया कि इस बार बोरों उत्पादन में ज्वार का पानी नहीं दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि इस फैसले से उनकी खेती पर सीधा असर पड़ेगा और वे आंदोलन के मूड में हैं।
🌟 किसानों का विरोध संगठित
- विरोध को संगठित करने के लिए कृषक संघर्ष परिषद की पहल पर रविवार शाम उत्तर जिन्याडा हाई स्कूल में बड़ी सभा हुई।
- अध्यक्षता: गोपाल सामंत
- मुख्य वक्ता: नारायण चंद्र नायक (सामान्य सचिव)
- अन्य उपस्थित पदाधिकारी: कार्तिक हाजरा, विश्वरूप अधिकारी, गोविंद पड़िया, तपन माइती।
- सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 2 दिसंबर को किसानों का विशाल डेलिगेशन बीडीओ कार्यालय जाकर विरोध दर्ज करेगा।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि खाल सुधार का काम तुरंत शुरू कर जनवरी के पहले सप्ताह तक जारी रखा जाए, फिर अप्रैल से जून के अंत तक पूरा जोर देकर अधिकांश कार्य समाप्त किया जाए।

⚖️ किसानों की चिंता
- नारायण चंद्र नायक ने कहा: “पिछले वर्ष जलबंद स्थिति के कारण अमन चावल की खेती नहीं हो सकी। अब अगर बोरों खेती भी प्रभावित होती है तो किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।”
- उन्होंने मांग की कि तत्काल निकासी खालों का नवनिर्माण और कंक्रीट ब्रिज निर्माण शुरू किया जाए।
नारायणबाबू ने चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक पंचायत समिति अपना निर्णय नहीं बदलती, तो मंगलवार को आंदोलन तय है।
🌍 स्थिति का असर
- अमन चावल की खेती पहले ही प्रभावित हो चुकी है।
- अब बोरों खेती पर संकट मंडरा रहा है।
- किसानों का कहना है कि यदि पानी की आपूर्ति रोकी गई तो उनकी आजीविका पर गहरा असर पड़ेगा।
इस बीच, बीडीओ कार्यालय सूत्रों के अनुसार, देहाटी खाल सुधार को लेकर सोमवार को पुनः उच्चस्तरीय प्रशासनिक बैठक बुलायी गई है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। किसानों की नाराज़गी को देखते हुए प्रशासन भी खोजने में जुटा है।
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