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पुणे : विश्व हिन्दी दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

भारतीय संस्कृति धरोहर और परंपराओ में हिन्दी का महत्वपूर्ण स्थान है

पुणे। विश्व हिन्दी दिवस 10 जनवरी 2026 को वारजे स्थित च्वाईस कॉलेज पुणे के सहयोग से राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन एवं विश्व हिन्दी प्रचार प्रसार सेवा संस्थान इकाई पुणे तथा नागरी लिपि परिषद् नई दिल्ली इकाई महाराष्ट्र का संयुक्त आयोजन दो दिवसीय सम्पन्न हुआ। यह जानकारी राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शहेनाज शेख ने बताया कि प्रथम दिवस 10 जनवरी 2026 को शुभारम्भ सत्र में राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. आफताब अनवर शेख च्वाईस कॉलेज पुणे ने की।

मुख्य अतिथि डॉ. नीला माधव कोपणकर (कार्याध्यक्ष महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा पुणे) ने उद्बोधन में कहा कि हिन्दी भाषा में ज्ञान-विज्ञान और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पुस्तको का अभाव नहीं होना चाहिए लेखको से अनुरोध है पुस्तके लिखना चाहिए। उन्होने कहा कि युवा पीढ़ी को पुस्तके पढ़ने की आदत बनानी चाहिए।

समारोह के विशिष्ट अतिथि एवं राष्ट्रीय संयोजक डॉ. रंजीत सिंह अरोरा ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी भाषाओं में बसती है। उन भाषाओं में हिन्दी वह सेतु है जिसने विविधता में एकता के लिए राष्ट्र की वैचारिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक सूत्र में बांधने का ऐतिहासिक कार्य किया है।

विश्व हिन्दी समारोह का शुभारम्भ आदर्श शिक्षका पूज्या सावित्रीबाई फुले के चित्र पर राष्ट्रीय संगठन महामंत्री डॉ. प्रभु चौधरी ने अतिथियों की उपस्थिति में किया। तत्पश्चात् सरस्वती वंदना नेहा सिंह ने एवं अतिथियों का स्वागत डॉ. शाकिर शेख, डॉ. भावना गुप्ता, डॉ. निर्मलांसह ने किया। स्वागत भाषण डॉ. बाबा शेख ने प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी की प्रस्तावना डॉ. प्रभु चौधरी ने देते हुए बताया कि जब किसी भाषा में साहित्य सृजन हो रहा हो, उसके बोलने वाले विश्व के अनेक देशो में बसते हो, उसमें सम्पूर्ण रूप से ज्ञान-विज्ञान एवं तकनीकी से संबंधित विपुल भंडार हो, हिन्दी हमारी विश्व में निश्चित ही प्रथम स्थान प्राप्त करेगा।

मुख्य वक्ता डॉ. अर्चना नायर सहायक निदेशक राजभाषा आयकर विभाग पुणे ने कहा कि हिन्दी अनेक बोलियों का समुच्चय है। अपने संगठित रूप से यह भारत और विदेशो में बसे प्रेमी विद्वानो का समुदाय में हिन्दी विश्व को चमकृत करती रही है।

भारत एवं हिन्दी प्रेमी विद्वानो ने इसका अध्ययन, शोध, अनुशीलन और अध्यापन कर इसे व्यापक धरातल प्रदान किया है। विशिष्ट अतिथि डॉ. अलका पोद्दार, प्रा. मनीषा तानपुरे, सुश्री धनश्री दावरे प्रा. रवि किरण गलंगे, सो. सुनेत्रा गोदकर आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. शहेनाज शेख ने एवं आभार डॉ. शेख ने माना।

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