खड़गपुर। शहर में स्पंज आयरन प्रदूषण के खिलाफ आम लोगों का आंदोलन काफी समय से चल रहा है। इसी प्रदूषण के कारण और उसके प्रभाव को लोगों तक पहुँचाने के लिए 10 जनवरी को खड़गपुर ट्रैफिक हाई स्कूल में एक किताब प्रकाशित की गई।
यह किताब “खड़गपुर में स्पंज आयरन प्रदूषण और आम लोगों का आंदोलन” नाम से प्रकाशित हुई है। इसे “खड़गपुर प्रदूषण विरोधी मंच” द्वारा जारी किया गया है, जिसमें खड़गपुर की 16 संगठन शामिल हैं जो स्पंज आयरन प्रदूषण के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
इस किताब का विमोचन आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर प्रतीप चक्रवर्ती ने किया। इस कार्यक्रम में ट्रैफिक हाई स्कूल के प्रधान शिक्षक तापस माइती, प्रोफेसर माखनलाल नंदगोस्वामी, कवि सुनील माझी और कई अन्य लोग उपस्थित थे। किताब का संपादन विजय पालित ने किया।

कार्यक्रम में पहले देबाशीष दे ने स्लाइड शो दिखाया और अंत में स्पंज आयरन पर एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। इस किताब में बताया गया है कि स्पंज आयरन क्या है, इसे बनाने के सरकारी नियम क्या हैं, इसके नुकसान क्या हैं?
खड़गपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों पर इसका असर, मिट्टी और पानी का प्रदूषण, और रश्मि फैक्ट्री में मजदूरों की मौतों के मामले तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा रश्मि के खिलाफ की गई शिकायतों का पूरा विवरण दिया गया है।
इसमें खड़गपुर में स्पंज आयरन फैक्ट्री लगने के बाद से अब तक हुए सभी आंदोलनों और उनके प्रभावों की जानकारी भी दी गई है। पहली बार इस किताब में रश्मि फैक्ट्री के पास के पानी और मिट्टी की जांच रिपोर्ट और उसमें पाए गए जहरीले तत्वों तथा पर्यावरण पर उसके असर के बारे में मेदिनीपुर कॉलेज के प्रोफेसर माखनलाल नंदगोस्वामी ने लिखा है।
डॉक्टर अमलेंदु सामंत ने स्पंज आयरन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर प्रकाश डाला है और मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर सैकत शीट ने प्रदूषण और कैंसर के बीच संबंध को समझाया है। इसके अलावा कवि सुनील माझी, पूर्व प्रधान शिक्षक रणजीत माझी, कई शिक्षक, प्रोफेसर, शोधकर्ता और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी इस किताब में लेख लिखे हैं।
खड़गपुर प्रदूषण विरोधी मंच का कहना है कि इस किताब का उद्देश्य लोगों की सोच को बदलना है। स्पंज आयरन क्यों नुकसानदायक है, यह सिर्फ बोलने की बात नहीं बल्कि इस किताब में तथ्य और प्रमाण के साथ बताया गया है। यह किताब लोगों को यह भी समझाएगी कि आंदोलन से बदलाव आता है। इसमें पूरे भारत और खड़गपुर में हुए आंदोलनों की सफलताओं का विवरण भी दिया गया है।
आखिर में यह संदेश दिया गया है कि अगर खड़गपुर को इस प्रदूषण से बचाना है तो सड़क पर उतरकर आंदोलन करना ही एकमात्र रास्ता है। घर बैठकर जहरीली हवा लेना नहीं, बल्कि सड़कों पर उतरकर विरोध करना ही प्रदूषण के खिलाफ असली लड़ाई है।
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