आसनसोल। हिंदी गवेषक परिषद, आसनसोल (प.बं.) के तत्वावधान में हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा (प.बं.) के प्रथम कुलपति, संकायाध्यक्ष, कला एवं वाणिज्य संकाय, विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर (प.बं.) एवं निदेशक, दूरस्थ शिक्षा निदेशालय, विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर (प.बं.) प्रो. (डॉ.) दामोदर मिश्र की सेवानिवृत्ति के अवसर पर एक सम्मान समारोह का आयोजन हिंदी भवन, उषाग्राम, आसनसोल में हुआ।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा (प.बं.) के प्रथम रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) सुकृति घोषाल जी उपस्थित थे। कार्यक्रम मूलतः छ सत्रों में संचालित हुआ। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में शिल्पांचल की चर्चित गायिका आकांक्षा बारी ने स्वागत गीत गाकर सभागार में उपस्थित सभी लोगों का अभिनंदन किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रो. (डॉ.) दामोदर मिश्र के जीवन-वृत्त को संक्षेप में त्रिवेणी देवी भालोटिया कॉलेज, रानीगंज के सहायक प्राध्यापक डॉ. आलम शेख ने सबके सामने प्रस्तुत किया। इसी कड़ी में बी.बी. कॉलेज की छात्र-छात्राओं ने क्रमशः प्रो. दामोदर मिश्र के सृजन कर्म, उनके धर्म, दर्शन व काव्यशास्त्र से सम्बंधित विचारों को सबके सामने प्रस्तुत किया।
तीसरा सत्र मूलतः प्रो. (डॉ.) दामोदर मिश्र को संवर्द्धना देने का सत्र था, जिसमें कार्यक्रम में आगत मुख्य अतिथि, अन्य अथिति एवं हिंदी गवेषक परिषद, आसनसोल के सदस्यों ने प्रो. (डॉ.) दामोदर मिश्र को उत्तरीय, पुष्पगुच्छ, कुछ उपहार एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस सत्र के अंतिम चरण में हिंदी गवेषक परिषद, आसनसोल के सचिव डॉ. विजेंद्र कुमार ने मान-पत्र का वाचन करते हुए उसे मिश्र जी को भेंट की।
चतुर्थ सत्र स्मृतिचारण का सत्र था। इस सत्र में डॉ. सुकृति घोषाल के अतिरिक्त कथाकार सृंजय, नवीन चन्द्र सिंह, मनोहर भाई पटेल, जयप्रकाश नारायण, मनोज यादव आदि शिल्पांचल के विभिन्न साहित्यकार व साहित्य प्रेमियों ने प्रो. मिश्र से संबंधित अपने-अपने अनुभवों को मंच से साझा किया।
मुख्य अतिथि प्रो. घोषाल ने मिश्र जी की हिंदी-बांग्ला समावेशी कर्म व चिंतन से सभी को रूबरू करवाया और उन्हें धैर्यवान कर्मपुरुष के निभ्रांत दृष्टांत के रूप में सबके समक्ष प्रस्तुत किया।
पंचम सत्र काव्य पाठ एवं पुस्तक विमोचन का था, जिसमें सबसे पहले शिल्पांचल के आनंद कुमार आनंद, अवधेश कुमार अवधेश, दिनेश गुप्ता गर्ग एवं शीला बरनवाल आदि कवियों ने अपनी कविताओं से दर्शकों को मुग्ध किया। तत्पश्चात प्रो. मिश्र के शोधार्थी रहे डॉ. विजय रवानी एवं डॉ. प्रियंका गुप्ता की क्रमशः हिंदी उपन्यासों में नारी के विविध रूप एवं प्रेमचंद और शरदचंद्र के उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन’ शीर्षक पुस्तकों का मंचासीन अतिथियों के द्वारा लोकार्पण हुआ।
कार्यक्रम के अंतिम एवं छठे सत्र में प्रो. मिश्र ने अपने अकादमीय एवं प्रशासकीय कर्म जीवन के अनुभवों को साझा की और उनके सम्मान में आयोजित कार्यक्रम को एक सुसंस्कृत परंपरा की पहचान के अनुरूप स्वयं सहित पूरे शिल्पांचल के सम्मान के रूप में अभिहित करते हुए स्वीकार किया और भविष्य में इस परंपरा के तदन्तर संवहन एवं विकास की कामना की। प्रो. मिश्र के वक्तव्य के बाद त्रिवेणी देवी भालोटिया कॉलेज, रानीगंज के सहायक प्राध्यापक एवं हिंदी गवेषक परिषद के सदस्य डॉ. जयराम पासवान ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम का अंत पहलगाम आतंकी हमले एवं उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच हुई झड़प में दिवंगत हुए आम नागरिको एवं सैनिकों की आत्माओं की शांति हेतु एक मिनट की मौन प्रार्थना के साथ हुआ। पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन जे.के. कॉलेज, पुरुलिया की सहायक प्राध्यापिका डॉ. ललिता महतो ने किया।
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