कोलकाता हिन्दी न्यूज | 06 अगस्त 2026: बांगबासी मॉर्निंग कॉलेज के हिंदी विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में “प्रेमचंद का कथा साहित्य : सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्य और समकालीन भारत” विषय पर एक सार्थक एवं विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में हिंदी साहित्य के महान कथाकार प्रेमचंद के साहित्य में निहित सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदना, सामाजिक न्याय तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की समकालीन प्रासंगिकता पर गंभीर विमर्श हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज की छात्रा द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार, विशिष्ट वक्ता डॉ. रेश्मि पांडा मुखर्जी तथा विभाग के अन्य प्राध्यापकों द्वारा मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्पार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।
संचालन और स्वागत
कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रीपर्णा तरफदार ने किया। उन्होंने मंचासीन अतिथियों एवं उपस्थित सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया तथा स्वागत वक्तव्य के लिए विभाग के प्राध्यापक पीयूष कांत राय को आमंत्रित किया।
उन्होंने अपने स्वागत वक्तव्य में संगोष्ठी के उद्देश्य और प्रेमचंद के साहित्य की व्यापक सामाजिक प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
विषय-प्रवेश
विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार ने विषय-प्रवेश करते हुए साहित्य को संवेदना के समन्वय के रूप में व्याख्यायित किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर संवेदना का होना आवश्यक है, क्योंकि संवेदनशीलता ही मनुष्य को साहित्य और समाज से गहरे स्तर पर जोड़ती है।
उन्होंने प्रेमचंद के साहित्य के संदर्भ में समाज और साहित्य के अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए बताया कि प्रेमचंद का रचना-संसार अपने समय के सामाजिक यथार्थ को अभिव्यक्त करने के साथ-साथ आज के समाज के लिए भी अनेक महत्वपूर्ण प्रश्न उपस्थित करता है।
मुख्य वक्तव्य
संगोष्ठी की विशिष्ट एवं मुख्य वक्ता डॉ. रेश्मि पांडा मुखर्जी ने प्रेमचंद के कथा-साहित्य के विविध आयामों पर अत्यंत प्रभावशाली एवं विद्वतापूर्ण वक्तव्य प्रस्तुत किया।
उन्होंने प्रेमचंद के साहित्य को उनके विविध पात्रों और उनकी जीवन-स्थितियों के माध्यम से समझाते हुए सामाजिक विषमता, शोषण, मानवीय संवेदना, न्याय और लोकतांत्रिक चेतना जैसे महत्वपूर्ण पक्षों को रेखांकित किया।
उनके वक्तव्य ने विद्यार्थियों को प्रेमचंद के साहित्य को केवल पाठ्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि समाज और जीवन की गहरी समझ विकसित करने वाले साहित्य के रूप में देखने की दृष्टि प्रदान की।
सहभागिता और समापन
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं उपस्थित प्राध्यापकों की सहभागिता ने संगोष्ठी को और अधिक जीवंत बनाया। वक्ताओं के विचारों ने प्रेमचंद के साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर विचार करने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम के अंत में हिंदी विभाग की प्राध्यापिका प्रियंका सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विशिष्ट वक्ता, विभागाध्यक्ष, महाविद्यालय के प्राध्यापकों, विद्यार्थियों तथा कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
संगोष्ठी ने प्रेमचंद के साहित्य को वर्तमान सामाजिक संदर्भों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों एवं साहित्यप्रेमियों के लिए एक सार्थक वैचारिक मंच प्रदान किया।
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