प्रयागराज | 22 जनवरी 2026: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे के भीतर दूसरा नोटिस जारी किया है।
इस नोटिस में प्रशासन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उन्हें माघ मेले से हमेशा के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है, साथ ही उनकी संस्था को आवंटित जमीन और अन्य सुविधाएं भी रद्द की जा सकती हैं।
⚠️ प्रशासन का आरोप: “सुरक्षा घेरा तोड़ा”
मेला प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रशासन के अनुसार—मौनी अमावस्या के दिन आपात स्थिति के लिए आरक्षित पांटून पुल पर लगाए गए बैरियर को जबरन तोड़ा गया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई।

- 🐎 बग्घी के प्रयोग पर आपत्ति
भारी भीड़ के बावजूद बिना अनुमति संगम क्षेत्र में बग्घी ले जाने की कोशिश की गई। प्रशासन का कहना है कि इससे मेला क्षेत्र में अव्यवस्था फैल गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती थी।
⏰ 24 घंटे का अल्टीमेटम
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि—
- यदि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया,
- तो भविष्य में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मेला परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी।
⚖️ ‘शंकराचार्य’ पदवी के इस्तेमाल पर भी विवाद
नोटिस में केवल अनुशासनहीनता ही नहीं, बल्कि ‘शंकराचार्य’ पदवी के उपयोग पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि—स्वयं को शंकराचार्य बताकर बोर्ड और प्रचार सामग्री लगाना कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन हो सकता है।
गौरतलब है कि ज्योतिषपीठ की शंकराचार्य पदवी को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और स्वामी वासुदेवानंद के बीच विवाद पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है।
🗣️ अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार
प्रशासन की कार्रवाई पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने 8 पन्नों का विस्तृत जवाब भेजते हुए चेतावनी दी कि— “यदि प्रशासन ने नोटिस वापस नहीं लिया, तो वे मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएंगे।”
🔎 विवाद की जड़: 18 जनवरी को क्या हुआ था?
मौनी अमावस्या के दिन स्नान के लिए पालकी में जाते समय पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उन्हें रोककर पैदल चलने का आग्रह किया। इसी दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई।
घटना से नाराज़ होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। तभी से मेला प्रशासन और शंकराचार्य के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।
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