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“प्रत्यावर्तन : द होमकमिंग” – सफ़ेद कोटों की स्मृतियों का सिनेमाई पुनर्जन्म

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। एक सादे लेकिन भावपूर्ण समारोह में, मानवता के मसीहाओं डॉक्टरों का आत्मिक पुनर्मिलन साकार हुआ। जिस चित्र में उन्होंने अपने छात्रजीवन की हँसी, आँसू, मेहनत और सपनों को रंगा है, उसी चलचित्र “प्रत्यावर्तन – द होमकमिंग” का पोस्टर और ट्रेलर अब परदे पर दस्तक दे चुका है।

यह महज एक फ़िल्म नहीं, बल्कि उन गलियारों की गूँज है जहाँ स्टेथोस्कोप की धड़कनें युवाओं के दिल की धड़कनों से मिलती थीं। मेडिकल कॉलेज के पूर्व और वर्तमान विद्यार्थियों ने मिलकर इस कृति को जीवंत किया है।

एक आत्मकथात्मक यात्रा, जो दोस्ती, प्रेम, बिछोह और पुनर्मिलन की स्याही से लिखी गई है।इस फ़िल्म का निर्देशन डॉ. शुद्धसत्व चट्टोपाध्याय ने किया है, और इसकी कल्पना के जनक हैं डॉ. अभिक घोष एक ऐसा नाम जिसने ‘रिटर्न’ को केवल कहानी नहीं, एक भाव बना दिया है।

कथा लिखी है प्रख्यात ऑर्थोपेडिक सर्जन और साहित्यकार डॉ. चिन्मय नाग ने, जिन्होंने हड्डियों के जोड़ के साथ-साथ संवेदनाओं के तार भी जोड़े हैं। इस सिनेमाई चिकित्सा में सभी कलाकार चिकित्सक हैं जैसे शरीर और आत्मा दोनों का उपचार एक साथ होता है।

डॉ. अयन मुखर्जी, डॉ. प्रीथा चक्रवर्ती, डॉ. अमित घोष, डॉ. अनिर्वाण दोल, डॉ. सोम दत्त – हर चेहरा एक अध्याय, हर भूमिका एक जीवन अनुभूति। विशेष उपस्थिति में हैं पूर्व सांसद डॉ. संगमित्रा और विधायक डॉ. निर्मल माज़ी।

इसमें जुड़ते हैं चिकित्सा जगत के कई प्रतिष्ठित नाम डॉ. सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, डॉ. रंजन बनर्जी, डॉ. चिरंजीत पाल, डॉ. भास्कर भट्टाचार्य – जो मनुष्यता के मंच पर चरित्र बनकर लौटे हैं। इस फ़िल्म की कहानी छह मेडिकल विद्यार्थियों की है।

उनके कॉलेज में प्रवेश से लेकर जीवन के उतार-चढ़ाव तक की यात्रा, और बीस वर्ष बाद एक रीयूनियन पर उनका लौट आना, जैसे जीवन की नदी फिर अपने उद्गम पर लौट आती है।

यही है “होमकमिंग” – माँ की गोद में लौटते बच्चे की तरह। फ़िल्म में छह गीत हैं – दो रवींद्र संगीत की आत्मा से, दो प्रसिद्ध संगीतकार डॉ. शिवालिक बनर्जी के सुरों से, एक निर्देशक डॉ. शुद्धसत्व चट्टोपाध्याय द्वारा रचित, और अंतिम गीत मेडिकल कॉलेज का थीम सॉन्ग, जिसकी धुन नयनमणि और डॉ. रामप्रसाद मंडल ने बुनी है। हर गीत फिल्म की भावनाओं को न केवल सजाता है बल्कि उनके भीतर साँस लेता है।

“प्रत्यावर्तन” केवल डॉक्टरों की कहानी नहीं, यह उन सभी के लिए दर्पण है जिन्होंने कभी अपने सपनों को किसी शपथपत्र की तरह गंभीरता से निभाया है। नया वर्ष इस सिनेमाई दस्तावेज की शुरुआत लेकर आएगा, और शायद, हम सबको यह याद दिलाएगा कि हर विदा के पीछे कहीं न कहीं एक वापसी छिपी होती है।

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