होली के रंगों में सराबोर हुआ काव्य मंच

चेन्नई । सामयिक परिवेश तमिलनाडु अध्याय की मासिक काव्य-गोष्ठी होली के अवसर पर ऑडियो के माध्यम से शनिवार 5 मार्च 2022 शाम 3:00 बजे से प्रारंभ हुई। काव्य गोष्ठी की मुख्य अतिथि ममता महरोत्रा जो कि संस्था की संस्थापिका एवं प्रधान संपादक भी हैं उन्ही के मार्गदर्शन में यह गोष्ठी संपन्न हुई। उन्होंने अपने उद्बोधन में होली पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं दी संस्था की गतिविधियों से अवगत कराया। विशिष्ट अतिथि सामयिक परिवेश के राष्ट्रीय सूचना संचार एवं आईटी प्रमुख अशोक गोयल थे उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि आदरणीया ममता महरोत्रा के अथक प्रयासों से आज सामयिक परिवेश अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है। अध्यक्षता संस्था के संपादक श्याम कुवंर भारती ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में संस्था की साहित्यिक गतिविधियां एवं नई योजनाओं के बारे में अवगत कराया उन्होंने बताया कि संस्था कुछ गरीब परिवारों की आर्थिक मदद भी कर रही है जिन्हें इलाज की जरूरत थी। सरस्वती वंदना नम्रता श्रीवास्तव ने की एवं मंच संचालन वरिष्ठ कवि संतोष श्रीवास्तव ‘विद्यार्थी’ ने बहुत ही बेहतरीन ढंग से किया। स्वागत भाषण डॉ. मंजू रुस्तगी एवं धन्यवाद ज्ञापन सरला विजय सिंह ‘सरल’ ने किया। सौहार्दपूर्ण वातावरण में गोष्ठी संपन्न हुई।

गोष्ठी में भाग लेने वाले प्रतिभागी एवं उनकी रचना की कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार हैं-
श्याम कुवंर भारती ने “दसो दिशा दियना जरईबो, काली मईया मंदिर सजईबो हो।” “खेलत नहीं होली ये ननदी, जबले चुकईहे नाही बदला देशबा”, डॉ. मंजु रुस्तगी ने “होली इस विध खेलियो मन कलुष धुल जाए, प्रीत का रंग ऐसो चढ़े इस रंग सब रंग जाए”, संतोष श्रीवास्तव ‘विद्यार्थी’ ने अपने पिताजी के पुण्यतिथि पर उन्हें समर्पित रचना “ऐ मेरे जन्मदाता मैं हूँ तेरी निशानी, कुछ भी नहीं है मेरा सब तेरी मेहरबानी”, अशोक गोयल ने “हमसे नजर मिलाइये होली का रोज है, तीरे नजर चलाइये होली का रोज है”, अंजनी कुमार ‘सुधाकर’ ने “तीन रंगों की पिचकारी लेकर भुवन आज खेल रहा है होली”, डॉ. सत्येंद्र शर्मा ने “वहां खून की होली खेले उसको कब हम रोकेंगे हिटलर फिर से पैदा होता कभी न क्या हम टोकेंगे”, उषा टिबड़ेवाल ‘विद्या’ ने “जब हुआ प्यार खामोशी में मेरी रूह में तेरी मौजूदगी पाई”, सरला ‘सरल’ ने “चलो इस बार कुछ ऐसी होली मनाएँ, दिल में उग रही नफरत की जड़ें मिटाएँ”, नम्रता श्रीवास्तव ने “लेके रंगों की फुहार आ गया होली का त्यौहार, प्रेम की गंगा बहाने आया सबका प्रिय त्योहार।”

स्नेह लता गुरुंग ने “रंगों का त्योहार है होली खुशियों का त्योहार है होली”, रमा कुवंर ने “आओ सब मिलकर खेलें हम होली लाल हरे पीले रंग बिखरे गली गली”, डॉ. राजलक्ष्मी कृष्णन ने “आओ आज हम सब मिलकर होली का त्योहार मना लें”, सुधीर श्रीवास्तव ने “होली के हुड़दंग का उल्लास खोता जा रहा है, ऐसा लग रहा जैसे इस पर्व का भाव खोता जा रहा है”, संजय जैन ने “तुम्हें कैसे रंग लगाएँ और कैसे होली मनाएँ”, प्रतिभा जैन ने “होली की खुशी अब होती नहीं गुलाल अब शरारत से लगाती नहीं”, शीतल शैलेंद्र देवयानी ने “आज रंग अबीर गुलाल मन को हृदय को कोर-कोर रंग गयो”, मिथिलेश सिंह ने होली का त्योहार जब आता है खुशियाँ लेकर आता है सुमन सेंगर ने “बसंतों का यह मौसम है गुलाबों की जवानी है”, डॉ. सुनीता जाजोदिया ने “बौराया नहीं बसंत से मन होली में, तनाव से बोझिल है मौसम होली में”, सबने अपनी रचनाओं द्वारा समा बाँध दिया। कुल 20 प्रतिभागियों ने काव्य पाठ में भाग लिया।

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