साहित्य और हास्य के रंग बिखेरता कवि सम्मेलन
कोलकाता। “सेल” कोलकाता में यादगार शाम 26 नवंबर 2025 की सांझ भारतीय इस्पात प्राधिकरण (SAIL) की सेल, सीएमओ में एक अनमोल आयोजन का साक्षी बनी, जहाँ कविताओं की मधुर सुरभि, हास्य की कमालिया और भावनाओं की गहराई ने हर दिल को छू लिया।
अपराह्न बेला में सेल के कार्यपालक निदेशक प्रभारी सुरेश राजा मोहन, कार्यपालक निदेशक (विपणन सेवाएं) अनिल कुमार अरोड़ा, मुख्य महाप्रबंधक वित्त लेखा सुनंदा नाग, महाप्रबंधक (मानव संसाधन) प्रशांत ओझा एवं संजीत दास एवं राजभाषा अधिकारी अजय शंकर मिश्र सहित आमंत्रित कवियों ने दीप प्रज्वलित कर इस साहित्यिक महोत्सव का शुभारंभ किया।

प्रारंभ में सेल के राजभाषा अधिकारी अजय शंकर मिश्र ने सभी आगत अतिथियों का काव्यमयी स्वागत किया तथा उपस्थित कवियों को सेल कर्मियों का परिचय अपनी एक स्वरचित कविता के माध्यम से कराते हुए पूरा माहौल ही खुशनुमा बना दिया। इस आयोजन में कविताओं की ऐसी उमंग थी जैसे शब्दों में बसंत की बहार आ गई हो।
कोलकाता महानगर के स्वनामधन्य कवि जयकुमार रुसवा के रोचक संचालन में खचाखच भरे हाल में कवि सम्मेलन की शुरुआत हुई तदुपरांत कवयित्री प्रणति ठाकुर ने सरस्वती वंदना के साथ हृदय को स्पर्श करने वाले कई मधुर गीतों के माध्यम से श्रोताओं का मन मोह लिया।
विश्वजीत शर्मा ‘सागर’ की गूढ़ और मार्मिक कविताओं ने श्रोताओं के मन को झंकृत किया। हास्य कवि आदित्य त्रिपाठी की हास्यरस से लिपटी कविताओं ने हँसी की झड़ी लगा दी।
आदित्य त्रिपाठी ने विगत दिनों दिल्ली में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना की झलक भी अपनी कविता के माध्यम से दिखाई और उसे बम ब्लास्ट की घटना पर केंद्रित अपनी कविता सुनाकर श्रोताओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आज इंसानियत कितनी शर्मसार हो चुकी है।
वहीं प्रसिद्ध हास्य कवि- जयकुमार रुसवा ने अपनी प्रस्तुति से मंच का रंग ही पलट दिया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में सेल अधिकारी अजय शंकर मिश्र ने प्रतिभाशाली कवियों का परिचय दिलकश अंदाज में दिया, जिससे माहौल में उत्साह और भी बढ़ गया। हर कविता और हास्य प्रस्तुति ने श्रोताओं के दिलों में तालियों की गूँज भर दी, तन-मन को तरोताजा करते हुए उन पलों को अविस्मरणीय बना दिया।
यह साहित्यिक संगम न सिर्फ भावों का उत्सव था, बल्कि उन काव्य रचनाओं और हास्यरस के संगम से जन्मी खुशी और उमंग की एक अनूठी तस्वीर भी थी, जिसने हर उपस्थित जन को मंत्रमुग्ध कर दिया। कविताओं के मधुर लहरों और हँसी-ठहाकों की गूंज के बीच यह शाम एक यादगार अनुभूति बन गई।
भारतीय इस्पात प्राधिकरण (SAIL) के इस आयोजन ने यह प्रमाणित कर दिया कि साहित्य और हास्य की शक्ति से सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक समृद्धि की एक नई लहर पैदा की जा सकती है। आने वाले समय में भी ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत और हिंदी साहित्य को समृद्ध करते रहेंगे।
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