गोपाल नेवार की कविता : “मेरी माँ”

मेरी माँ

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माँ मेरी माँ मैं तेरी लाड़ली हूँ
माँ बेशक मैं तेरी छोटी बेटी हूँ
तेरी ममता को मैं खूब समझी हूँ
तेरी असुविधा से मैं परिचित हूँ।

अब से मैं तेरी लाड़ली बेटी नहीं
बल्कि तेरी सारी उम्र माँ बनकर
तेरी सेवा करना चाहती हूँ
माँ मेरी माँ मैं बेटी नहीं तेरी माँ हूँ ।****************************

सीधी बात

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अरे भाई !
इतना भी सीधा न बना करो,
जो अपनों के ही दु:ख-दर्दों मैं
कभी भी साथ न दो।

अरे भाई !
इतना भी चतुर न बना करो,
जो अपनों को ही धोखा देकर
सदा के लिए दु:ख-दर्द दो।

अरे भाई !
न सीधा न चतुर बना करो
बस एक मानव की तरह
मानवता का परिचय दिया करो ।

गोपाल नेवार, गणेश सलुवा ।

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