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अर्जुन अज्जू तितौरिया की कविता : “मातृभूमि”

मातृभूमि”

ये भूमि मात्र भूमि नहीं, मातृभूमि है,
इसका वंदन धर्म का अभिनंदन है।
सनातन धर्म, राष्ट्र धर्म हमारा अस्तित्व है,
यह बलिदानों की पुण्यभूमि है।
वीरांगनाओ की वीरता की
तपो भूमि है,
यह वीरों की वीरता की
नमो भूमि है।
यह सनातन की धरा
यह हिंदुत्व की भूमि है,
है जिसके कण कण में राम
यह वो अयोध्या की भूमि है।
जहां कृष्ण ने गीता के उपदेश दिए
यह वही कुरुक्षेत्र की भूमि है,
जहां कृष्ण ने रास रचा है।
यह वही वृंदावन भूमि है,
कैलाश पर्वत जिसका है मुकुट।
यह वही स्वर्ग से सुंदर भूमि है,
बहती जिसमें अविरल गंगा, यमुना।
हिंदुकुश पर्वत शान है,
हिन्द महासागर हमारे
शौर्य की पहचान है।
यही जम्बूद्वीप
यही आर्यावर्त
यही भारतवर्ष
यही हिंदुस्तान है,
इस भूमि को कोटि कोटि प्रणाम है।

अर्जुन अज्जू तितौरिया

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