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सौमेन राय की कविता : तन्हाई

।।तन्हाई।।

शलों में लिपटी चिंगारी
और बस रही है तन्हाइयाँ
खामोश है दिल की धड़कन
पूछ रही है तू कहाँ
प्यास यह बुझाए न बुझाए
मिटाए न मिटे
धड़क रही है सीने में आग
दर्द भरी यह दास्तान
वो सफर जो पूरी न हुई
तेरे कदमों के निशान रहे गए
कुछ लम्हों की साथ थी
वो हाथ पीछे छूट गए
थम गई सी है वक़्त
इंतज़ार न ख़त्म हुई अब भी तेरे लिए
दास्तान है आँसुओं की
दर्द में लिपटे हुए
पल दो पल की साथ थी
पल दो पल की ख़ुशी
खामोश है आज धड़कन
अंदरों में क्यों खो गए
पूछ रही है दिल की धड़कन
न जाने तुम कब आओगे
तड़प रहा हूँ मैं
सिर्फ़ और सिर्फ़ तेरे लिए
सीने में जलन लिए हँसना भी है यहाँ
जीना भी है यहाँ
रह गए तेरे कदमों के निशान
पूछ रही है तू है कहाँ

©सौमेन राय

सौमेन रॉय, कवि

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