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डॉ. आर.बी. दास की कविता

कुछ भी कहीं भी
हमारे बिना रुकेगा नहीं…
इसलिए अपने आपको खास समझने की गलती न करें…
परिस्थितियां जब विपरीत होती है,
तब “प्रभाव और पैसा” नहीं,
स्वभाव और संबंध काम आते हैं…
परिश्रम सौभाग्य की जननी है,
देने के लिए “दान”
लेने के लिए “ज्ञान” और
त्यागने के लिए “अभिमान” सर्वश्रेष्ठ है।
अच्छे के साथ अच्छा और बुरे के साथ बुरा नहीं,
क्योंकि हीरे से हीरा तराशा जा सकता है,
लेकिन कीचड़ से कीचड़ साफ नहीं किया जा सकता…!!
सभी ब्राह्मण
परशुराम नहीं बन सकते!
सभी दलित
आंबेडकर नहीं बन सकते!
सभी राजपूत
महाराणा प्रताप नहीं बन सकते!
सभी मुस्लिम
अब्दुल कलाम नहीं बन सकते!
और जिन लोगों ने,
अपने मन में जातपात का भेदभाव पाल रखा है,
वो कभी इंसान नहीं बन सकते…!!

Dr. R.B. Das
Adv. supreme court,
Advisor (UGC)
National Sec.
SC/ST commission

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