कोलकाता | 01 अक्टूबर 2026: हिंदी माह के समापन अवसर पर पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 1 कांचरापाड़ा में दिनांक 30 सितंबर 2026 को अपराह्न 2:15 बजे विद्यालय पुस्तकालय में राजभाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालय में राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता, हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना तथा हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि विकसित करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ निर्धारित विधि से किया गया। इसके पश्चात स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का औपचारिक स्वागत उत्तरीय एवं शुभकामना संदेश द्वारा किया गया।
विद्यालय के प्राचार्य द्वारा स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया। उन्होंने राजभाषा हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यालयीन कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग तथा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
कविता पाठ
इसके बाद कविता पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें प्रणव कुमार, माधवी कुमारी, राजेन्द्र प्रसाद, शरबानी भट्टाचार्य और पीयूष कुमार मिश्रा ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं।
विशिष्ट अतिथि का वक्तव्य
कविता पाठ के पश्चात विशिष्ट अतिथि डॉ. आनंद मोहन उपाध्याय द्वारा अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया गया। उन्होंने हिंदी भाषा, साहित्य एवं राजभाषा के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए सभी को हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया और उसके ऐतिहासिक महत्व पर ध्यान आकर्षित किया।
मुख्य अतिथि डॉ. बिक्रम कुमार साव का संबोधन
मुख्य अतिथि डॉ. बिक्रम कुमार साव ने अपने संबोधन में हिंदी की व्यापकता, उपयोगिता तथा राष्ट्र के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन में उसके महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, “हिंदी केवल एक भाषा नहीं, भारत की आत्मा है। इसकी व्यापकता देखिए – कश्मीर से कन्याकुमारी तक, मुर्शिदाबाद से मुम्बई तक समझी और बोली जाती है। उपयोगिता की बात करें तो एफसीआई, बैंकिंग सेक्टर, रेलवे, सेना तमाम सरकारी और गैर सरकारी कार्यालय सबका कामकाज हिंदी जोड़ती है। किसान की मंडी से लेकर वैज्ञानिक के लैब तक हिंदी पहुँच गई है।
सामाजिक व सांस्कृतिक जीवन में हिंदी तुलसी के रामायण से लेकर प्रेमचंद की कहानियों तक हमारे संस्कार बनाती है। त्योहार, फिल्म, भजन सब हिंदी में एक होते हैं। यही हिंदी को भारत की संपर्क भाषा और दिल की भाषा बनाती है।”
उन्होंने आगे कहा कि आज हिंदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंग्रेजी नहीं, क्षेत्रीयता की संकीर्ण सोच है।
“हम बंगाली, तमिल, मराठी होने पर गर्व करते हैं, यह होना भी चाहिए, पर जब यही गर्व दूसरों को हीन समझने लगे तो वह अंधकार बन जाता है। अक्सर कहा जाता है – ‘हिंदी थोप दी जा रही है या हिंदी कठिन है या हिंदी सिर्फ हिंदी भाषियों की भाषा है।’ मैं चाहूंगा कि भारत के तमाम भाषा भाषी इस तरह के भ्रम जाल में न पड़े। हिंदी ने कभी किसी भाषा को हटाया नहीं। उसने उर्दू से ‘दिल’, बांग्ला से ‘जल’, अंग्रेजी से ‘स्टेशन’ सब अपना लिया। यही उसका राष्ट्रीय स्वरूप है। हमें क्षेत्रीयता में बंधना नहीं है बल्कि राष्ट्रीयता से जुड़ना है।”
सम्मान समारोह
कार्यक्रम के दौरान राजभाषा हिंदी के कार्यों में योगदान देने वाले कार्मिकों को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित कार्मिकों में प्रभात उपाध्याय, धर्मेंद्र रॉय, पवन कुमार, रवि केसरी, राजेन्द्र प्रसाद, लिली घोष, संजीव बिस्वास, सुमित नाहर, नमिता रजक और प्रतीक्षा पटेल शामिल रहे।
हिंदी माह के अंतर्गत आयोजित शिक्षक कविता पाठ प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कार प्रदान किए गए। पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों में सुमित नाहर, पीयूष कुमार मिश्रा, माधवी कुमारी, शरबानी भट्टाचार्य और कुमारेश मंडल का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।
समापन
इसके पश्चात विद्यालय के प्राचार्य द्वारा प्राचार्य संदेश प्रस्तुत किया गया। उन्होंने हिंदी माह के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों में सभी विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया और राष्ट्रभाषा/राजभाषा हिंदी के प्रति सम्मान एवं हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लेते हुए कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया।
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