कोलकाता | 24 मार्च 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में मध्य पूर्व में चल रही जंग पर सदन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के सामने भी अप्रत्याशित चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। उन्होंने इस संघर्ष का प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका जताई और कहा कि कोविड के दौरान सप्लाई चेन में संकट आया था, लेकिन देश ने एकजुटता से उसका मुकाबला किया।
संघर्ष का वैश्विक और भारतीय प्रभाव
पीएम मोदी ने कहा, “पश्चिम एशिया की हालत चिंताजनक है। इस संकट को तीन हफ्तों से अधिक हो रहा है। इस जंग से पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर असर पड़ रहा है।” उन्होंने ऊर्जा ढांचे पर हमलों, होर्मुज स्ट्रेट में स्वतंत्र आवाजाही में बाधा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गहराई से बात की।
भारत की तैयारियां और स्टॉक
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर का पर्याप्त स्टॉक है। उन्होंने कहा:
- भारत के पास 53 लाख मिट्रिक टन का स्ट्रेटेजिक रिजर्व है।
- अतिरिक्त 65 लाख मिट्रिक टन रिजर्व बनाने पर काम चल रहा है।
- तेल कंपनियों के पास अलग रिजर्व है।
- होर्मुज स्ट्रेट में फंसे कई जहाज सुरक्षित भारत पहुंचे हैं।
- वैश्विक सहयोगियों से लगातार बातचीत जारी है।
इथेनॉल ब्लेंडिंग और वैकल्पिक ऊर्जा पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 10 साल में इथेनॉल उत्पादन और ब्लेंडिंग बढ़ी है। आज पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग हो रही है, जिससे साढ़े चार करोड़ बैरल कम तेल आयात करना पड़ रहा है।
रेलवे के बिजलीकरण से हर साल 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हो रही है। मेट्रो नेटवर्क 1100 किलोमीटर हो गया है और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर बहुत बल दिया जा रहा है। केंद्र ने राज्यों को 15 हजार इलेक्ट्रिक बसें दी हैं।
विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा
प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने पश्चिम एशिया के नेताओं से दो दौर बात की और भारतीयों की सुरक्षा का विश्वास मिला है। हालांकि कुछ भारतीयों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हुई है। प्रभावित देशों में भारतीय मिशन 24 घंटे सक्रिय हैं।
युद्ध शुरू होने से अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित लौटे हैं। ईरान से 1000 भारतीय (जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र) लौटे हैं। सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं।
प्रियंका गांधी ने दोहराई चर्चा की मांग
भाषण के बाद संसद के बाहर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नई बात नहीं कही। उन्होंने संसद में विस्तृत चर्चा की मांग दोहराई और कहा कि सभी पक्षों को बोलने का मौका मिलना चाहिए।
संबोधन के मायने क्या हैं?
- ऊर्जा सुरक्षा पर चेतावनी हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में कोई रुकावट भारत में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और गैस की कीमतों को बढ़ा सकती है। पीएम ने संसद को यह संदेश दिया कि सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और कोई कमी नहीं होने देगी।
- राष्ट्रीय एकता का संदेश उन्होंने कोविड काल की याद दिलाकर कहा कि चुनौती कितनी भी बड़ी हो, अगर देश एकजुट रहे तो हम पार पा सकते हैं। यह एक तरह से सभी दलों से अपील थी कि इस मुद्दे पर राजनीति न करें।
- कूटनीति और सतर्कता का संतुलन पीएम ने साफ किया कि भारत शांति और बातचीत का पक्षधर है, लेकिन अपनी ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।
- घरेलू राजनीति में संदेश पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के चुनाव नजदीक हैं। इस संबोधन से सरकार यह दिखाना चाहती है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच भी वह सतर्क और सक्रिय है, और विपक्ष को यह संकेत है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर एकजुटता जरूरी है।
- लंबे समय का संकट पीएम ने संकेत दिया कि यह संकट जल्द खत्म होने वाला नहीं है, इसलिए हमें आर्थिक रूप से मजबूत और तैयार रहना होगा।
सरकार की रणनीति
पीएम मोदी ने कहा कि भारत सरकार एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाकर हर दिन बैठक कर रही है। सभी सेक्टर के स्टेक होल्डर्स के साथ चर्चा हो रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश इस संकट का सामना करेगा।
संक्षेप में यह संबोधन मुख्य रूप से चेतावनी + आश्वासन + एकता का था। पीएम ने देश को बताया कि स्थिति गंभीर है, लेकिन सरकार तैयार है और कोई कमी नहीं होने देगी। साथ ही संसद के जरिए विपक्ष और जनता दोनों को संदेश दिया कि इस संकट में राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दें।
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