नई दिल्ली | 3 दिसंबर 2025 : पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिल्ली में बंगाल से भाजपा सांसदों के साथ बैठक की। इस बैठक में उन्होंने ममता बनर्जी सरकार को मात देने के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की।
🌟 बैठक की मुख्य बातें
- पीएम मोदी ने सांसदों को कहा कि वे जनता के बीच लगातार सक्रिय रहें और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दें।
- उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने पर जोर दिया।
- बैठक में राज्य की कानून-व्यवस्था, रोजगार और केंद्र की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई।
- पीएम मोदी ने सांसदों को निर्देश दिया कि वे जनता तक केंद्र सरकार की उपलब्धियों को पहुँचाएँ और विपक्ष के आरोपों का तथ्यात्मक जवाब दें।
पश्चिम बंगाल में साल 2026 यानि अगले साथ विधानसभा चुनाव होने हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल के बीजेपी सांसदों को सलाह दी है कि राज्य में चल रहा एसआईआर अभियान सरल और पारदर्शी रहे।
प्रधानमंत्री से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, उन्होंने जोर देकर कहा कि SIR प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल न बनाया जाए और यह संदेश बूथ स्तर तक पहुंचना चाहिए।

⚖️ राजनीतिक संदर्भ
- पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं।
- भाजपा का लक्ष्य है कि वह ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कड़ी चुनौती दे।
- पार्टी ने हाल ही में बंगाल में SIR प्रक्रिया और रोजगार मुद्दों को लेकर ममता सरकार पर हमला बोला है।
- पीएम मोदी की यह बैठक चुनावी रणनीति को और धार देने के रूप में देखी जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘SIR ड्राइव को सरल और पारदर्शी रखें. इसका उद्देश्य केवल इतना है कि पात्र मतदाताओं का नाम शामिल हो और जो पात्र नहीं हैं उनके नाम हटाए जाएं।’ उन्होंने प्रक्रिया में स्पष्टता और दक्षता पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने सांसदों से यह भी कहा कि 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के दौरान वे फोकस्ड और आत्मविश्वासी रहें। सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी की ताकतों का पूरा उपयोग करने और पिछले वर्षों में बनी हुई गति को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
🌍 आगे की राह
- भाजपा सांसदों को निर्देश दिया गया है कि वे जनसंपर्क अभियान तेज करें।
- पार्टी जल्द ही बंगाल में बड़े जनसभा और रैलियों की घोषणा कर सकती है।
- राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक भाजपा की चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सीधे तौर पर नाम लिए बिना प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को सलाह दी कि वे विपक्ष की बयानबाज़ी से विचलित न हों। उन्होंने याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी किस तरह बढ़ी है।
2011 में मात्र तीन विधायकों से लेकर 2016 तक पार्टी की उपस्थिति में बड़ा विस्तार हुआ और इस प्रगति को लगातार आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि वे पार्टी की संगठनात्मक शक्ति और जमीनी समर्थन पर भरोसा रखें। उन्होंने कहा, ‘हमें मेहनत करनी है और सुनिश्चित करना है कि हम बंगाल का चुनाव जीतें।’
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