कोलकाता, (Kolkata) : पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कैश फॉर स्कूल जॉब घोटाले में फंसे राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को भ्रष्टाचार से जुड़े CBI केस में उन्हें जमानत दे दी है।
हालांकि, यह राहत तत्काल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पार्थ चटर्जी की रिहाई तीन महीने बाद निचली अदालत द्वारा तय किए गए बेल बॉन्ड पर निर्भर करेगी।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया कि ट्रायल कोर्ट को चार हफ्तों के भीतर आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, और उसके बाद दो महीने में गवाहों की गवाही भी पूरी की जाए।
🧾 क्या है पूरा मामला?
- यह घोटाला पश्चिम बंगाल में स्कूलों में नौकरी के बदले रिश्वत लेने से जुड़ा है
- CBI और ED दोनों एजेंसियां इस मामले की अलग-अलग जांच कर रही हैं
- अब तक की जांच में 151.26 करोड़ रुपये की अवैध राशि सामने आई है
- इसमें से 103.78 करोड़ रुपये की संपत्ति पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के नाम पर है
🗣️ पहले भी मिली थी राहत
यह पहली बार नहीं है जब पार्थ चटर्जी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। इससे पहले 13 दिसंबर 2024 को उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले (ED केस) में जमानत दी गई थी, जो 1 फरवरी 2025 से लागू हुई थी।
🔍 राजनीतिक और कानूनी असर
इस फैसले के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज़ हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे “प्रक्रियात्मक राहत” बताया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। वहीं, CBI ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।
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