Temperatures may rise by 3.1°C by the end of the century: United Nations

पेरिस समझौता: जलवायु संकट के बीच उम्मीद की 57 ठंडी साँसें

Climate कहानी, कोलकाता। 17 अक्टूबर 2025 : जब दुनिया हर साल बढ़ती गर्मी से जूझ रही है, एक नई रिपोर्ट ने उम्मीद की खिड़की खोली है। Climate Central और World Weather Attribution की संयुक्त स्टडी के अनुसार, अगर देश पेरिस समझौते के तहत तय किए गए उत्सर्जन कटौती के वादों को पूरा करें, तो सदी के अंत तक दुनिया को हर साल 57 कम गर्म दिन मिल सकते हैं।

🌡️ 4°C बनाम 2.6°C: फर्क सिर्फ़ डिग्री का नहीं, ज़िंदगी का है

तापमान वृद्धि संभावित “बहुत गर्म दिन” भारत में फर्क
4°C 114 दिन/वर्ष +60 दिन
2.6°C 57 दिन कम –30 दिन
  • “बहुत गर्म दिन” = जब तापमान 90वें परसेंटाइल से ऊपर चला जाए
  • भारत-पाकिस्तान में गर्मी की संभावना 2 गुना ज़्यादा हो चुकी है
  • अमेज़न में यह बढ़ोतरी 10 गुना, माली-बुर्किना फासो में 9 गुना है

Climate story. AI's attack on heat

2015 में जब पेरिस समझौता हुआ, तब वैज्ञानिकों का मानना था कि अगर कुछ नहीं किया गया तो सदी के अंत तक दुनिया 4°C तक गर्म हो जाएगी।
ऐसे में पृथ्वी पर औसतन 114 “बहुत गर्म दिन” हर साल आते — वो दिन जब तापमान ऐतिहासिक औसत से 90वें परसेंटाइल से ऊपर चला जाता है।

🧠 विशेषज्ञों की चेतावनी

  • प्रो. फ्रिडेरिक ओटो, इम्पीरियल कॉलेज लंदन:

    “हर अंश का फर्क लाखों लोगों के जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी तय करता है।”

  • डॉ. क्रिस्टिना डाल, Climate Central:

    “हम अब भी खतरनाक भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। 2.6°C की दुनिया कहीं ज़्यादा निर्दयी होगी।”

  • रूप सिंह, रेड क्रॉस क्लाइमेट विशेषज्ञ:

    “हीट एक्शन प्लान अब भी आधी दुनिया तक नहीं पहुँचे हैं।”

  • प्रो. इमैनुएल राजू, कोपेनहेगन विश्वविद्यालय:

    “यह जलवायु नहीं, अन्याय का संकट है — जहाँ जिन्होंने सबसे कम नुकसान किया, वही सबसे ज़्यादा झुलस रहे हैं।”

Climate story. AI's attack on heat

रिपोर्ट कहती है कि “हर दसवां हिस्सा भी मायने रखता है।” 2015 से अब तक सिर्फ़ 0.3°C अतिरिक्त गर्मी आई है, लेकिन इससे दुनिया को हर साल 11 और गर्म दिन मिले हैं। इस छोटे-से बदलाव ने अमेज़न में गर्मी को 10 गुना, माली और बुर्किना फासो में 9 गुना, और भारत-पाकिस्तान में 2 गुना ज़्यादा संभावित बना दिया है।

🧾 रिपोर्ट की मुख्य बातें

  • हर 0.1°C की वृद्धि = 3 से 11 अतिरिक्त गर्म दिन
  • हीटवेव्स: 4°C की दुनिया में 5x से 75x ज़्यादा
  • हीट से मौतें: हर साल करीब 5 लाख
  • हीट एक्शन प्लान: आधे से ज़्यादा देश अब भी तैयार नहीं
  • पेरिस समझौता: अगर लागू हुआ, तो गर्मी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार

/paris-agreement-climate-central-report-57-less-hot-days-2025

स्टडी में छह हालिया हीटवेव्स का विश्लेषण किया गया — यूरोप, पश्चिम अफ्रीका, अमेज़न, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका में। अगर तापमान 4°C तक बढ़ा, तो ऐसी घटनाएँ आज की तुलना में 5 से 75 गुना ज़्यादा होंगी। यह अंतर सिर्फ़ तापमान का नहीं, जीवन की संभावना का है।

दुनिया आज 1.3°C की गर्मी पर खड़ी है। अगर हमने वादे पूरे किए तो शायद हम 57 कम गर्म दिन पा सकेंगे। अगर नहीं, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमारी नाकामी के ताप से झुलसेंगी। यह समझौता सिर्फ़ तापमान का नहीं — इंसानियत का है। क्योंकि हर अंश, हर डिग्री, किसी न किसी की साँस से जुड़ा है।

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