कोलकाता। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के विरोध के नाम पर लूट और आगजनी की घटनाओं को रोकने में ममता बनर्जी सरकार निष्क्रिय है। उन्होंने कहा कि हिंसा को रोकने में राज्य पुलिस की मदद के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को बुलाया जाना चाहिए। शुभेंदु अधिकारी ने छह निलंबित विधायकों के साथ विधानसभा कक्ष के प्रवेश द्वार पर धरना दिया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि राज्य के हालात को देखते हुए मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, गृह सचिव और शीर्ष नौकरशाहों की उच्च स्तरीय आपात बैठक बुलाई जानी चाहिए।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अधिकारी ने कहा कि हम शांतिप्रिय लोग हैं। उपद्रवी तत्वों से सख्ती से निपटना चाहिए। नौकरशाही को सक्रिय रूप से कार्य करना चाहिए और किसी राजनीतिक पार्टी या उसके नेताओं के इशारे पर काम नहीं करना चाहिए, बल्कि निष्पक्ष होकर अपना काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीन जिलों के समस्याग्रस्त इलाकों में शांति स्थापित करने के लिए पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की जानी चाहिए। जब अधिकारी से पूछा गया कि क्या स्थिति पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक होगी, तो उन्होंने कहा कि यह (तृणमूल कांग्रेस) सरकार विपक्ष को समायोजित करने में भरोसा नहीं करती।

इसने विरोध के स्वर को दबाने के लिए अलोकतांत्रिक तरीके से नेता प्रतिपक्ष सहित हमारे सात विधायकों को निलंबित कर दिया है। तृणमूल सरकार) लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती। यह केवल तुष्टिकरण की राजनीति जानती है। उन्होंने कहा कि इसलिए अगर कोई सर्वदलीय बैठक होती है तो उसमें शामिल होने का कोई गुण या मायने नहीं है, वह केवल दिखावा होगा। अधिकारी ने मार्क्सवादी नेता मोहम्मद सलीम और कांग्रेस नेता अधीर चौधरी पर भी उनके धर्मनिरपेक्षता के प्रति जुनून को लेकर कटाक्ष किया।

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