वाराणसी। पापांकुशा एकादशी व्रत का पालन करने से यमलोक में यातनाएं नहीं सहनी पड़ती हैं। आश्विन शुक्ल पक्ष पापांकुशा एकादशी एक वर्ष में 24 एकादशी होती हैं, लेकिन जब तीन साल में एक बार अधिकमास (मलमास) आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।
इस वर्ष सन 2025 में आश्विन शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 02 अक्टूबर गुरुवार शाम 07 बजकर 11 मिनट पर प्रारंभ होगी और 03 अक्टूबर शुक्रवार शाम 06 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। सूर्योदय व्यापिनी आश्विन शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 03 अक्टूबर शुक्रवार को होगी। अतः आश्विन शुक्ल पक्ष पापांकुशा एकादशी का व्रत 03 अक्टूबर शुक्रवार को किया जाएगा। इस व्रत का पारण 04 अक्टूबर शनिवार को होगा।
पापांकुशा एकादशी का नाम पाप रूपी हाथी को पुण्यरूपी व्रत के अंकुश से भेदने के कारण पड़ा। इस व्रत के पालन से व्यक्ति के माता-पिता एवं मित्रों की पीढ़ियों तक को मुक्ति मिल जाती है। यह व्रत पापों के नाश का साधन है। धर्मग्रंथों के अनुसार इस व्रत का पालन करने से यमलोक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है। एकादशी का व्रत अश्वमेध यज्ञ, जप, तप, तीर्थ-स्नान एवं दान से भी कई गुना श्रेष्ठ फल प्रदान करता है।
एकादशी व्रती को अपने चित्त, इंद्रियों और व्यवहार पर संयम रखना आवश्यक है। यह व्रत जीवन में संतुलन बनाए रखना सिखाता है। व्रती धर्म के मार्ग पर चलते हुए अर्थ और काम से ऊपर उठकर मोक्ष की प्राप्ति करता है। यह व्रत स्त्री-पुरुष दोनों ही कर सकते हैं।
इस दिन दान का विशेष महत्त्व है। स्वर्ण, भूमि, फल, वस्त्र, मिष्ठान्न, अन्न, विद्या दान, दक्षिणा एवं गौदान आदि यथाशक्ति करने से पापों का नाश होता है और परमपद की प्राप्ति होती है।
एकादशी व्रत पूजन विधि :
शारीरिक शुद्धता के साथ मन की पवित्रता भी आवश्यक है। व्रत के नियम दशमी तिथि से ही आरंभ हो जाते हैं। दशमी को सात्त्विक भोजन ग्रहण कर एकादशी की सुबह जल्दी उठें और शुद्ध स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। तत्पश्चात व्रत का संकल्प लेकर पति-पत्नी संयुक्त रूप से लक्ष्मीनारायण जी की पूजा करें।
घर में शुद्ध स्थान पर चौकी रखकर श्री गणेश एवं भगवान लक्ष्मीनारायण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। गंगाजल से शुद्धिकरण कर कलश स्थापना करें। इसके पश्चात नवग्रह, तीर्थ, योगिनियों एवं नगर-देवता का आवाहन करें। वैदिक मंत्रों एवं विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हुए षोडशोपचार पूजन करें। पूजन उपरांत कथा श्रवण व प्रसाद वितरण करें।
एकादशी के दिन “ॐ नमो वासुदेवाय” मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। यह व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
एकादशी के दिन ध्यान रखने योग्य बातें :
तामसिक आहार का सेवन न करें।
ब्रह्मचर्य का पालन करें।
शराब एवं नशे से दूर रहें।
दाढ़ी-मूंछ और नाखून न काटें।
पूजा के समय चमड़े की बनी वस्तुएं, बेल्ट, जूते-चप्पल न पहनें।
काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें।
किसी का दिल न दुखाएँ, यह सबसे बड़ी हिंसा है।
ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848
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