air pollution

भविष्य की तकनीक पर अत्यधिक भरोसा खतरनाक, कार्बन रिमूवल पर ऑक्सफोर्ड की सख़्त चेतावनी

निशान्त, Climate कहानी, कोलकाता: दुनिया जब रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और जलवायु संकट का सामना कर रही है, उसी बीच वैज्ञानिकों ने भविष्य की तकनीकों पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।

यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं की एक नई स्टडी में कहा गया है कि यदि देश मौजूदा समय में उत्सर्जन (एमिशन) कम करने की बजाय भविष्य की कार्बन हटाने वाली तकनीकों पर भरोसा करते हैं, तो यह जलवायु के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।


कार्बन रिमूवल जरूरी, लेकिन विकल्प नहीं

अध्ययन के अनुसार, कार्बन डाइऑक्साइड रिमूवल (CDR) यानी वातावरण से CO₂ हटाकर उसे सुरक्षित स्टोर करना जलवायु समाधान का एक अहम हिस्सा है।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अगर देश इसे मौजूदा समय में उत्सर्जन कम करने के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करते हैं, तो यह पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

CDR CCU CCS


भविष्य की तकनीकों पर बढ़ता दांव

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई देश अपनी नेट ज़ीरो रणनीतियों में बड़े पैमाने पर भविष्य की कार्बन हटाने वाली तकनीकों पर भरोसा कर रहे हैं।

लेकिन इन तकनीकों की व्यवहारिकता, सामाजिक स्वीकार्यता और समयसीमा को लेकर अभी भी कई अनिश्चितताएं मौजूद हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन पर अत्यधिक निर्भरता पृथ्वी के तापमान में लंबे समय तक ‘ओवरशूट’ यानी सुरक्षित सीमा से ऊपर जाने का खतरा बढ़ा सकती है।


कानूनी जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम

ऑक्सफोर्ड लॉ फैकल्टी की प्रोफेसर लवण्या राजामणि ने कहा कि कुछ देश अनिश्चित तकनीकों पर जोखिम भरा दांव लगा रहे हैं।

उनके मुताबिक — “यह रणनीति गंभीर और अपूरणीय जलवायु नुकसान का कारण बन सकती है। निकट भविष्य में उत्सर्जन में तेज़ कटौती सिर्फ नैतिक नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी भी है।”

654defee5ae262947f074f17 The carbon state removal picture


अंतरराष्ट्रीय कानून के ‘गार्डरेल्स’

स्टडी में 2025 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की सलाहकारी राय का हवाला दिया गया है। इसमें दो अहम सिद्धांतों पर ज़ोर दिया गया है —

  • ✔ हानि रोकथाम
  • ✔ ड्यू डिलिजेंस (सतर्कता का दायित्व)

इन सिद्धांतों के तहत देशों को सुनिश्चित करना होगा कि उनकी जलवायु नीतियों से अन्य देशों को नुकसान न पहुंचे और जोखिमों को लेकर जिम्मेदार रवैया अपनाया जाए।


देशों के लिए तय किए गए अहम नियम

अध्ययन में कुछ स्पष्ट दिशानिर्देश भी बताए गए हैं —

  • उत्सर्जन में तत्काल और तेज कटौती को प्राथमिकता देना
  • कार्बन रिमूवल तकनीकों की तकनीकी और सामाजिक व्यवहारिकता सुनिश्चित करना
  • संभावित नकारात्मक प्रभावों का मूल्यांकन करना
  • विदेशों में कार्बन रिमूवल परियोजनाओं पर अत्यधिक निर्भरता से बचना

Carbon capture vs carbon removal


पारदर्शिता को बताया सबसे अहम

शोध में कहा गया है कि देशों को अपनी जलवायु रणनीति में पूरी पारदर्शिता बरतनी होगी। उन्हें स्पष्ट करना होगा —

  • कौन सी कार्बन रिमूवल तकनीक अपनाई जा रही है
  • भविष्य के अनुमानों का आधार क्या है
  • उत्सर्जन और कार्बन हटाने की गणना अलग-अलग कैसे की जा रही है

भविष्य की पीढ़ियों पर असर

स्टडी के सह लेखक डॉ. रूपर्ट स्टुअर्ट स्मिथ ने कहा कि आज लिए जा रहे फैसले भविष्य की पीढ़ियों के जलवायु जोखिम तय करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्बन हटाने की योजनाएं तत्काल उत्सर्जन कटौती की जगह नहीं ले सकतीं।


अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों की भागीदारी

यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल Climate Policy में प्रकाशित हुआ है। इसमें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ इम्पीरियल कॉलेज लंदन, जर्मनी और ऑस्ट्रिया के शोध संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल रहे।

Carbon tax


रिपोर्ट का साफ संदेश

विशेषज्ञों के अनुसार कार्बन रिमूवल तकनीक जलवायु समाधान का हिस्सा जरूर है, लेकिन अगर वर्तमान कार्रवाई टालकर भविष्य की उम्मीदों पर भरोसा किया गया, तो यह वैश्विक तापमान नियंत्रण और कानूनी जिम्मेदारियों दोनों को खतरे में डाल सकता है।

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

9 + 18 =