कोलकाता। भारतीय खाद्य निगम, धनबाद के मंडल प्रबंधक चक्रपाणि सिद्धार्थ महोदय के अनुमोदन से कार्यालय परिसर में ‘कार्यालयीन हिंदी और कार्यालय में हिन्दी’ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन 12/6/25 दिन बृहस्पतिवार को सम्पन्न हुआ। जिसमें अतिथि वक्ता के रूप में बैरकपुर राष्ट्रगुरु सुरेन्द्रनाथ कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डॉ. बिक्रम कुमार साव उपस्थित रहें।
कार्यशाला में प्रबंधक महोदया गरिमा शर्मा, प्रबंधक सुशील कुमार गोंड सहित गौरव विजन, राजकुमार चौधरी, नरेश कुमार राम, पवन कुमार, दीपक इक्का, वासुदेव महतो, रिया मृधा, मनीषा प्रसाद, अभिषेक तिवारी, प्रियंका राय, रूपाली दास, गायत्री, चंदन कुमार सिंह, धनंजय कुमार, उज्जवल देमता धीरज भूषण भारती।
अंशु कुमार, दीपिका दास, विद्या मंडल, अभिजीत घोष, राहुल ओझा, स्वामी प्रकाश, सोहेल खान, राहुल कुमार, सद्दाम हुसैन, सुमित सिंह, नीरज कुमार पांडेय, विद्या भूषण, मो. परवेज आलम, रविरंजन कुमार सिंह, निमिषा उपाध्याय, रंजीत राम एवं अन्य कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
विषय पर अपनी बात रखते हुए अतिथि वक्ता डॉ. बिक्रम कुमार साव ने प्रशिक्षण ले रहे कर्मचारियों के समक्ष कार्यालयीन हिंदी की परिभाषा, उद्देश्य और आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यालय में हिंदी प्रयोग पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने 2011 में भारतीय गणराज्य के तत्कालीन प्रधानमंत्री माननीय मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में दिनांक 28 जुलाई 2011 को आयोजित केंद्रीय हिंदी समिति की 30वीं बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि राजभाषा हिंदी के सरल स्वरूप को प्रोत्साहित करने पर कार्यालय में बल दिया जाना चाहिए। कार्यालय में बोलचाल की भाषा में अनुवाद करने का यह अर्थ है कि उसमें अन्य भाषाओं के लोकप्रिय शब्द भी खुलकर प्रयोग में लाए जाएं।
14/09/2011 को आयोजित हिंदी दिवस के अवसर पर तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम की बातों का उन्होंने उल्लेख किया- “सहज सरल और बोलचाल की हिंदी ही समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों में लोकप्रिय होगी और स्थाई रूप से अधिक विशाल क्षेत्र में प्रयोग में लाई जाएगी।” अतः कार्यालय में हम टिप्पणी तथा पत्रादि के मसौदों में जहां तक हो सके आसानी से समझ में आने लायक शब्दों का अधिक से अधिक प्रयोग करें। बैठकों चर्चाओं आदि में हिंदी में बातचीत किए जाने को बढ़ावा देने से हिंदी का आधार और व्यापक एवं मजबूत होगा।
कार्यालय में हिंदी अनुप्रयोग (Application) आजीविका साधक, रोजगारमूलक, बैंकिंग, बीमा, वित्तीय एवं न्यायायिक आदि संदर्भों से जुड़ा होता है। समस्त भारतीय राज भाषाओं में यह विशेषताएं पाई जाती हैं। किंतु हिंदी तुलनात्मक दृष्टिकोण से इन राज भाषाओं में अग्रणी स्थान रखती है। शब्दावली आयोग ने अभी तक 9 लाख कृत्रिम शब्दों को तैयार किया है जो भारतीय ही नहीं बल्कि विश्व की किसी भाषा में नहीं है। यह शब्दावली कार्यालयीन हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु बैकबोन का काम करती है और इसके निर्माण में यूनीफॉर्मीटी आफ टर्मिनोलॉजी के सिद्धांत को अपनाया गया है।
उन्होंने कहा की कोई भाषा सरल या कठिन नहीं होती है वह या तो परिचित होती है या अपरिचित होती है। इन शब्दावलियों के परिचित होने से कार्यालय में हिंदी प्रयोग सहज तरीके से हो पाएगा। प्रशिक्षण ले रहे कर्मचारीयों के मध्य से कुछ कर्मचारियों ने हिंदी प्रयोग के संदर्भ में विविध भ्रामक तथ्यों एवं समस्याओं और प्रश्नों को कार्यशाला में वक्ता के सामने रखा।
उनकी शंकाओं और संदेहों का निराकरण डॉ. साव द्वारा उत्तर देकर किया गया। उत्तर पाकर वे संतुष्ट हुए और कार्यालय एवं व्यवहारिक जीवन में हिंदी भाषा के प्रयोग हेतु प्रेरित हुए। कार्यशाला का सफल संचालन कार्यालय के हिंदी प्रकोष्ठ के प्रभारी रंजीत राम ने एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रबंधक गरिमा शर्मा ने किया।
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