IMG 20260712 WA0074

आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई मंगलवार को, अपनी राशि के अनुसार करें दान

वाराणसी। मंगलवार को अमावस्या तिथि आने के कारण इसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाएगा। अमावस्या माह में एक बार ही आती है। अमावस्या तिथि के स्वामी पितृदेव हैं। आषाढ़ अमावस्या के विषय में श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धार्मिक दृष्टिकोण से इस दिन पितरों का पिंडदान तथा अन्य दान-पुण्य संबंधी कार्य किए जाते हैं। जो मनुष्य इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करता है, उसे हर तरह से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। उसे सभी प्रकार के रोगों और दुखों से मुक्ति प्राप्त होती है।

आषाढ़ कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 13 जुलाई सोमवार शाम 06 बजकर 50 मिनट पर प्रारंभ होगी और 14 जुलाई मंगलवार दोपहर 03 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। सूर्योदय व्यापिनी आषाढ़ अमावस्या तिथि 14 जुलाई मंगलवार को होने के कारण आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई मंगलवार को मनाई जाएगी।

इस दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण आदि एवं पवित्र नदियों में स्नान तथा दान करना शुभ रहेगा। यदि किसी कारणवश पवित्र नदियों में स्नान करना संभव न हो सके, तो घर में ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें तथा किसी गरीब को यथाशक्ति दान अवश्य करें। अमावस्या के दिन नदी या तालाब में जाकर मछलियों को आटे की गोलियां खिलाना भी अत्यंत फलदायी बताया गया है।

मंगलवार को अमावस्या तिथि आने के कारण इसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को आने वाली अमावस्या का पुण्यफल कई गुना अधिक माना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ से हनुमान जी की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।

अमावस्या पर करें ये उपाय :
अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए उपवास रखने से न केवल पितृगण, बल्कि ब्रह्मा, इंद्र, सूर्य, अग्नि, वायु, ऋषि, पशु-पक्षी तथा अन्य प्राणी भी तृप्त होकर प्रसन्न होते हैं।

अमावस्या को शास्त्रों में अत्यंत शुभ दिन माना गया है। इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है तथा शुभ फल प्राप्त होता है।

यह भी पढ़ें:  सिलीगुड़ी : चंपासारी में नाबालिग के शव बरामदगी को लेकर गहराई राजनीति

अमावस्या तिथि के दिन सूर्योदय काल में पवित्र नदियों या सरोवरों में स्नान करने तथा सामर्थ्य के अनुसार दान करने से सभी पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
तिल, दूध तथा तिल से बनी मिठाइयों का दान दरिद्रता दूर करने वाला माना गया है।

प्रत्येक अमावस्या के दिन अपने पितरों का ध्यान करें। ध्यान के साथ पीपल के वृक्ष पर कच्ची लस्सी, थोड़ा गंगाजल, काले तिल, चीनी, चावल, जल तथा पुष्प अर्पित करें। इस क्रिया के दौरान ‘ॐ पितृभ्यः नमः’ मंत्र का जाप करें। इसके पश्चात पितृसूक्त का पाठ करना शुभ फल प्रदान करता है।

अमावस्या के दिन सूर्यदेव को ताम्र पात्र में लाल चंदन, गंगाजल तथा शुद्ध जल मिलाकर तीन बार अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ पितृभ्यः नमः’ मंत्र का जाप करें।

अमावस्या पर नीलकंठ स्तोत्र, सर्पसूक्त तथा श्रीनारायण कवच का पाठ करने के बाद ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दिवंगत की पसंदीदा मिठाई, भोजन एवं दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए।

निःसंतान दंपत्तियों की कुंडली में संतान प्राप्ति के योग बनते हैं। यदि राहु नीच अवस्था में भाग्य स्थान पर बैठा हो, तो इस दिन किया गया व्रत उसके दुष्प्रभाव को कम करने वाला माना जाता है।

शाम के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक जलाएं। बत्ती में लाल रंग के धागे का उपयोग करें।

गरीबी दूर करने, संतान प्राप्ति तथा व्यवसाय में उन्नति के लिए चांदी का छोटा-सा पीपल बनवाकर दान करें।

भगवान विष्णु के मंदिर में ध्वजा अर्पित करें तथा मां लक्ष्मी को मेवा युक्त खीर का भोग लगाएं। इससे माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा को मन का देवता माना जाता है। अमावस्या के दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता। इसका प्रभाव विशेष रूप से भावुक स्वभाव वाले लोगों पर पड़ता है।

यह भी पढ़ें:  जंगल महल की जल समस्या दूर करने में सीआरपीएफ ने की मदद

इस दिन चंद्रमा के अदृश्य रहने के कारण मन में अस्थिरता बढ़ सकती है। नकारात्मक सोच रखने वाले लोग मानसिक रूप से अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

अमावस्या के दिन इन बातों का रखें विशेष ध्यान :
अमावस्या के दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।

ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। शराब तथा अन्य नशे से दूर रहना चाहिए। व्रत रखने वालों को दाढ़ी, मूंछ, बाल एवं नाखून नहीं कटवाने चाहिए।

पूजा के दौरान बेल्ट, चप्पल-जूते अथवा चमड़े से बनी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए। काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। किसी का दिल दुखाना सबसे बड़ी हिंसा मानी गई है। गलत कार्यों का दुष्परिणाम शरीर के साथ-साथ भविष्य पर भी पड़ता है।

आषाढ़ अमावस्या के दिन अपनी राशि के अनुसार करें दान :
अमावस्या के दिन आपकी राशि के अनुसार किया गया दान विशेष फलदायी माना जाता है।

मेष : गुड़, मूंगफली, तिल, तांबे की वस्तु तथा दही का दान करें।
वृष : सफेद वस्त्र, चांदी तथा तिल का दान करें।
मिथुन : मूंग दाल, चावल, पीले वस्त्र, गुड़ तथा कंबल का दान करें।
कर्क – चांदी, चावल, सफेद ऊन, तिल तथा सफेद वस्त्र का दान करें।

सिंह : तांबा, गुड़, गेहूं, गौमाता का घी, सोना तथा मोती का दान करें।
कन्या : चावल, हरे मूंग अथवा हरे वस्त्र का दान करें।
तुला : हीरा, चीनी, कंबल, गुड़ तथा सात प्रकार के अनाज का दान करें।
वृश्चिक : मूंगा, लाल वस्त्र, दही तथा तिल का दान करें।

धनु : वस्त्र, चावल, तिल, पीले वस्त्र तथा गुड़ का दान करें।
मकर : चावल, कंबल, गुड़ तथा तिल का दान करें।
कुंभ : काले वस्त्र, काली उड़द, खिचड़ी, कंबल, घी तथा तिल का दान करें।
मीन : रेशमी वस्त्र, चने की दाल, चावल तथा तिल का दान करें।

ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च करफॉलो करें।

पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री Avatar
यह भी पढ़ें:  भगवान जगन्नाथ जी के रथों का संक्षिप्त वर्णन!

“पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री वैदिक ज्योतिष के विद्वान हैं। वे दैनिक राशिफल, पंचांग, मुहूर्त, धर्म-कर्म और शुभ-अशुभ योगों पर विस्तृत जानकारी देते हैं। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र के गहन अध्ययन के साथ वे पाठकों को सरल भाषा में उपयोगी ज्योतिषीय सलाह प्रदान करते हैं।”

Fact Checked & Editorial Guidelines

Our Fact Checking Process

We prioritize accuracy and integrity in our content. Here's how we maintain high standards:

  1. Expert Review: All articles are reviewed by subject matter experts.
  2. Source Validation: Information is backed by credible, up-to-date sources.
  3. Transparency: We clearly cite references and disclose potential conflicts.
Reviewed by: Subject Matter Experts

Our Review Board

Our content is carefully reviewed by experienced professionals to ensure accuracy and relevance.

  • Qualified Experts: Each article is assessed by specialists with field-specific knowledge.
  • Up-to-date Insights: We incorporate the latest research, trends, and standards.
  • Commitment to Quality: Reviewers ensure clarity, correctness, and completeness.

Look for the expert-reviewed label to read content you can trust.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

twenty + fifteen =