Crud oil

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार, ब्रेंट 109.48 डॉलर पर

नई दिल्ली, 9 मार्च 2026: ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई है। कच्चे तेल की कीमतें शुक्रवार को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।

ब्रेंट क्रूड लगभग 18% की तेजी के साथ 109.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 109.75 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है। यह तेजी 1980 के दशक की शुरुआत के बाद तेल वायदा कारोबार में सबसे बड़े साप्ताहिक उछालों में से एक मानी जा रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति का बचाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल कीमतों में इस उछाल का बचाव करते हुए कहा कि यह ईरान के परमाणु खतरे का सामना करने की अस्थायी कीमत है।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा: “ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के बाद तेल की कीमतें जल्दी ही कम हो जाएंगी और दुनिया की सुरक्षा के लिए यह छोटी कीमत है।”

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति लगभग बंद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य पूर्व के बड़े तेल उत्पादकों ने उत्पादन कम कर दिया है और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति लगभग बंद जैसी स्थिति में है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि हमलों और धमकियों के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही काफी धीमी हो गई है।

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कई जहाज इस इलाके से गुजरने से बच रहे हैं। भंडारण टैंक भरने लगे हैं और निर्यात मार्ग बंद होने के कारण कुछ कंपनियों को कुओं को बंद करना या उत्पादन धीमा करना पड़ रहा है।

एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भारी गिरावट

इस स्थिति का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ा है। एशियाई बाजारों में कारोबार शुरू होते ही शेयर बाजारों में तेज गिरावट देखी गई।

  • जापान का बेंचमार्क इंडेक्स लगभग 5% गिरा
  • दक्षिण कोरिया का बाजार 7% से अधिक टूटा

दोनों अर्थव्यवस्थाएं आयातित तेल और गैस पर काफी हद तक निर्भर हैं।

विश्लेषकों का अनुमान

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। कुछ बाजार अनुमानों के अनुसार, इस साल के अंत तक कच्चा तेल 143 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।

ऊर्जा इतिहासकार डेनियल येर्गिन ने कहा कि यह स्थिति रोजाना तेल उत्पादन के लिहाज से दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा व्यवधान बन सकती है।

वैश्विक व्यापार मार्गों पर असर

वाशिंगटन पोस्ट ने बताया कि क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच व्यापारिक जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर एशिया और यूरोप पर पड़ सकता है, क्योंकि ये क्षेत्र ऊर्जा के लिए फारस की खाड़ी से आने वाले आयात पर ज्यादा निर्भर हैं।

अमेरिका पर प्रभाव

अमेरिका अपने घरेलू तेल उत्पादन और बढ़ते ऊर्जा निर्यात के कारण कुछ हद तक सुरक्षित हो सकता है, लेकिन वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि का असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। आमतौर पर ईंधन महंगा होने से परिवहन और खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं।

इतिहास में भी तेल संकट

इतिहास में भी फारस की खाड़ी में तेल संकट ने बड़ी आर्थिक समस्याएं पैदा की हैं। 1973 के अरब तेल प्रतिबंध और 1979 की ईरानी क्रांति के समय भी तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था और वैश्विक मंदी जैसी स्थिति बन गई थी।

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