कोलकाता | 1 सितंबर 2025 : पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी ने निर्देश जारी किया है कि अब कोई भी मंत्री, विधायक या अन्य जनप्रतिनिधि अपने हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों के साथ परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। यह निर्णय कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।
हालांकि इस नियम में एक विशेष छूट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दी गई है। उनके सुरक्षाकर्मी विधानसभा परिसर में हथियारों सहित प्रवेश कर सकेंगे, जिसे राज्य की कानून-व्यवस्था और संवैधानिक पद की गरिमा से जोड़ा गया है।
📌 मुख्य बिंदु:
- हाईकोर्ट का आदेश
- भाजपा विधायकों ने केंद्रीय सुरक्षाकर्मियों को प्रवेश न मिलने पर याचिका दायर की थी
- कोर्ट ने निर्देश दिया कि सुरक्षा के नाम पर किसी पक्ष को अनुचित लाभ न मिले
- विधानसभा अध्यक्ष का बयान
- “विधानसभा की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है”
- मुख्यमंत्री को संवैधानिक पद के कारण विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है
- राजनीतिक प्रतिक्रिया
- विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री की सुरक्षा टीम परिसर में प्रवेश करती है, तो भाजपा अवमानना याचिका दाखिल करेगी
- भाजपा ने इसे पक्षपातपूर्ण रवैया बताया और फुटेज अदालत में पेश करने की तैयारी की है
- नियम की व्याख्या
- सभी मंत्री और विधायक अपने सुरक्षा कर्मियों को विधानसभा के बाहर छोड़ेंगे
- परिसर में केवल अनहथियार सुरक्षाकर्मी या प्रशासनिक स्टाफ को अनुमति होगी
मुख्यमंत्री को रहेगी छूट
स्पीकर ने कहा कि मंत्रियों और विधायकों की सुरक्षा के लिए भी एक जैसा नियम होगा। सुरक्षाकर्मी उन्हें विधानसभा तक छोड़ सकते हैं, लेकिन उसके बाद उन्हें परिसर से बाहर जाना होगा।
हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर विपक्षी दलों के सुरक्षाकर्मियों को अंदर आने की अनुमति नहीं है, तो किसी अन्य सुरक्षाकर्मी को भी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा जरूरी है, जिसकी वजह से उन्हें छूट दी गई है। स्पीकर ने कहा कि यह नियम सभी पर लागू होगा, चाहे वे निजी सुरक्षाकर्मी हों, राज्य सरकार के हों या फिर सीआईएसएफ हो।
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