Now the sun will say in the closed coal mines- it's my turn!

बंद पड़ी कोयला खदानों में अब सूरज बोलेगा- मेरी बारी!

  • नई रिपोर्ट में सामने आया 300 गीगावॉट का जबरदस्त मौका

निशान्त, Climate कहानी, कोलकाता। दुनिया भर में जो कोयला खदानें या तो बंद हो चुकी हैं या इस दशक के अंत तक बंद हो जाएंगी, अगर उन्हें सौर ऊर्जा के लिए इस्तेमाल किया जाए — तो इतनी बिजली बन सकती है कि पूरा जर्मनी एक साल तक रोशन रहे! ये खुलासा किया है Global Energy Monitor (GEM) की नई रिपोर्ट ने।

GEM के मुताबिक़, 2020 के बाद से 312 ऐसी ओपन-पिट कोयला खदानें बंद पड़ी हैं जिनका कुल एरिया 2,000 वर्ग किलोमीटर से ज़्यादा है। अगर इन्हें सोलर पैनल लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाए, तो यहां से 103 गीगावॉट बिजली निकाली जा सकती है।

और यह तो सिर्फ़ शुरुआत है।

2023-30 के बीच दुनिया भर में और भी 3,700 वर्ग किलोमीटर की कोयला खदानें बंद हो सकती हैं। अगर इन जगहों पर भी सोलर पैनल लग जाएं, तो कुल क्षमता 300 गीगावॉट तक पहुँच सकती है — यानी पूरी दुनिया की मौजूदा सोलर क्षमता का 15%।

Coal

कौन-कौन से देश हैं इस रेस में आगे?

  • चीन ने अभी तक सबसे तेज़ी दिखाई है — 90 कोयला-सौर प्रोजेक्ट चालू हो चुके हैं (14 GW), और 46 प्लानिंग में हैं (9 GW)
  • भारत, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका — ये चार देश इस बदलाव में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

क्या फायदा होगा?

  • पुराने खदान इलाकों की साफ़-सफ़ाई और ज़मीन का दोबारा इस्तेमाल
  • 2.6 लाख स्थायी नौकरियाँ, और 3.1 लाख अस्थायी/निर्माण से जुड़ी नौकरियाँ
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था में जान, पर्यावरण की सेहत में सुधार
यह भी पढ़ें:  विश्वास को निरंतर बनाए रखना हमारा दायित्व : मोदी

Coal

GEM के प्रोजेक्ट मैनेजर चेंग चेंग वू कहते हैं — “कोयले की विरासत ज़मीन में दर्ज है, लेकिन वही ज़मीन अब जलवायु समाधान की ज़मीन बन सकती है।”

रिसर्चर हेली डेरेस के मुताबिक़, “नई जमीनों को लेकर दुनिया भर में झगड़े हो रहे हैं। लेकिन खदानों जैसी बंजर जगहें हमें एक नया रास्ता दिखा सकती हैं — क्लीन एनर्जी और क्लीन कम्युनिटी का।”

और GEM के असिस्टेंट डायरेक्टर रयान ड्रिस्कल टेट जोड़ते हैं “जब कोयला कंपनियाँ दिवालिया होती हैं, तो मज़दूरों को निकालकर पीछे बस गंदगी छोड़ जाती हैं। लेकिन यही जगहें अब सोलर से रोशन हो सकती हैं — बस ज़रूरत है सही पॉलिसी मिक्स और राजनीतिक इच्छाशक्ति की।”

भारत के लिए क्या मतलब है?

भारत जहां एक तरफ़ क्लीन एनर्जी की रफ्तार पकड़ने की कोशिश कर रहा है, वहीं ये रिपोर्ट साफ़ दिखाती है कि अगर हम बंद होती खदानों का सही इस्तेमाल करें — तो सौर ऊर्जा और रोज़गार दोनों में क्रांति आ सकती है। बस ज़रूरत है — सोच बदलने की।

यह भी पढ़ें:  राजीव कुमार बने मुख्य निर्वाचन आयुक्त

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च करफॉलो करें।

Kolkata News Desk Avatar

Kolkata News Desk

News Editor MA

कोलकाता और पश्चिम बंगाल की ब्रेकिंग न्यूज, स्थानीय घटनाओं, खेल, राजनीति और सामाजिक मुद्दों की खबरों को कवर करता है। हमारी डेस्क टीम 24×7 सक्रिय रहकर पाठकों को ताज़ा और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराती है।

Areas of Expertise: Sports, Politics & West Bengal
यह भी पढ़ें:  192 करोड़ रुपए का है दिल्ली आबकारी नीति घोटाला: ED
Fact Checked & Editorial Guidelines

Our Fact Checking Process

We prioritize accuracy and integrity in our content. Here's how we maintain high standards:

  1. Expert Review: All articles are reviewed by subject matter experts.
  2. Source Validation: Information is backed by credible, up-to-date sources.
  3. Transparency: We clearly cite references and disclose potential conflicts.
Reviewed by: Subject Matter Experts

Our Review Board

Our content is carefully reviewed by experienced professionals to ensure accuracy and relevance.

  • Qualified Experts: Each article is assessed by specialists with field-specific knowledge.
  • Up-to-date Insights: We incorporate the latest research, trends, and standards.
  • Commitment to Quality: Reviewers ensure clarity, correctness, and completeness.

Look for the expert-reviewed label to read content you can trust.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

seventeen − 1 =