स्पोर्ट्स डेस्क, कोलकाता | 18 अगस्त 2026: टेलीविजन और डिजिटल मनोरंजन की दुनिया में दो दशक से अधिक समय तक पहचान बनाने वाली निवेदिता बसु अब एक नई भूमिका में नजर आ रही हैं—प्रतिस्पर्धी स्क्वैश खिलाड़ी के रूप में।
40 की उम्र के बाद गंभीरता से स्क्वैश अपनाने वाली निवेदिता आज मास्टर्स सर्किट में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और अपनी कैटेगरी में सीडेड खिलाड़ी बन चुकी हैं।
खेल उनके खून में
खेल उनके लिए बचपन से ही जीवन का हिस्सा रहा है। पिता टेनिस और स्क्वैश खेलते थे, जबकि मां राष्ट्रीय स्तर की टेबल टेनिस और हैंडबॉल खिलाड़ी रही हैं। निवेदिता कहती हैं, “फल पेड़ से ज्यादा दूर नहीं गिरता।”
करियर और नई शुरुआत
बालाजी टेलीफिल्म्स के साथ ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’, ‘कहानी घर घर की’ और ‘कसौटी जिंदगी की’ जैसे चर्चित शोज से जुड़ी रहीं निवेदिता ने बाद में नेतृत्व और उद्यमिता की राह भी चुनी। अब स्क्वैश उनके लिए सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि लक्ष्य और प्रतिस्पर्धा का माध्यम है।
कोलकाता में आयोजित नेशनल मास्टर्स स्क्वैश चैंपियनशिप में सेमीफाइनल तक पहुंचकर उन्होंने अपनी क्षमता साबित की।
उनका मानना है: “मैं यह नहीं बदल सकती कि मैंने कब शुरुआत की, लेकिन अब इसे कितनी गंभीरता से लेती हूं, यह मेरे हाथ में है।”
महिलाओं के लिए पहल
महिलाओं को खेल से जोड़ने के लिए उन्होंने वीमेन एंड रैकेट स्पोर्ट्स पहल भी शुरू की है। उनका संदेश साफ है— “40 के बाद नई शुरुआत करना देर नहीं, बल्कि खुद को फिर से खोजने का मौका है।”
निष्कर्ष: निवेदिता बसु का सफर साबित करता है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। टीवी की दुनिया से निकलकर स्क्वैश कोर्ट पर अपनी नई पहचान बनाने वाली यह कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा है।
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