तटीय महाराष्ट्र के ऊपर कमजोर पड़ा चक्रवाती तूफान “निसर्ग”

फोटो, साभार : गूगल

मुंबई : भारतीय मौसम विभाग ने कहा गंभीर चक्रवाती तूफान निसर्ग तटीय महाराष्ट्र के ऊपर एक चक्रवाती तूफान के रुप में कमजोर हो गया है। अगले 24 घंटों के दौरान महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में अलग-थलग स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा, भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना। अगले ढाई घंटों के दौरान महाराष्ट्र के रायगढ़, धुले, नंदुरबार, नासिक जिलों में अलग-थलग स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा और ठाणे, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, अहमदनगर, पुणे, कोल्हापुर, सातारा जिलों में भारी वर्षा होने की संभावना है।

इधर महाराष्ट्र सरकार ने कहा रत्नागिरी और श्रीवर्धन में बिजली आपूर्ति की बहाली का काम शुरू हो गया है।मुरुड, मांडगाँव, गोरेगांव, अलीबाग, म्हसाला, गुहागर, दापोली तालुकाओं में जहाँ EHVस्टेशनों से बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई थी।वहां जैसे ही हवा और बारिश धीमी होगी बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

भारतीय मौसम विभाग ने बुधवार दोपहर को कहा कि चक्रवात ‘निसर्ग’ की भूस्खलन प्रक्रिया अगले एक घंटे तक जारी रहेगी, क्योंकि इसका पिछला हिस्सा अभी भी समुद्र के ऊपर है। आईएमडी ने दोपहर 2.10 बजे के अपने बुलेटिन में कहा कि गंभीर चक्रवाती तूफान छह घंटे में कमजोर पड़ जाएगा।

मौसम विभाग ने कहा कि महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में दोपहर एक बजे भूस्खलन प्रक्रिया शुरू हो गई थी और यह अगले एक घंटे तक जारी रहेगी। हवा की गति भी घटकर 90-100 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई है, जो पहले 110 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई थी।

आईएमडी ने कहा कि भयंकर चक्रवाती तूफान महाराष्ट्र तट को पार कर गया है और वर्तमान में यह मुंबई से 80 किलोमीटर की दूरी पर रायगढ़ जिले के अलीबाग इलाके में केंद्रित है। मौसम विभाग ने महाराष्ट्र के कम से कम सात तटीय जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया था। मौसम ब्यूरो के अनुसार, गुजरात के तटों के साथ कई जिलों में भी भारी बारिश की उम्मीद जताई गई है।

निसर्ग चक्रवात ने हाल ही में बंगाल की खाड़ी में आए ‘अम्फान’ के बाद कहर बरपाया है। अम्फान 20 मई को पूर्वी भारत और बांग्लादेश के तटीय इलाकों से टकराया था, जिसकी वजह से करीब 90 लोगों की जान चली गई थी। इस भयंकर चक्रवात ने कई गांवों को तबाह कर दिया था और इससे किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा था। इसके अलावा बिजली के खंभे गिरने से लाखों लोगों को बिना बिजली के रहना पड़ा।

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