उज्जैन। लिपि भाषा की वाहिका है और भाषा की संगत में ही लिपि का सम्यक विकास हो सकता है। देवनागरी का लिपि व्यवस्था को परिष्कृत, संवर्धित करने में अहम योगदान है। देश-विदेश की अधिकतर भाषाएं देवनागरी लिपि के माध्यम से सुगमता से लिखी जा सकती हैं।
आज कुछ क्षेत्रों में देवनागरी लिपि के रोमन लिपि के प्रयोग से द्विलिपि व्यवस्था हमारे लिए बड़ी चुनौती है। आज आवश्यकता इस बात की है कि बहु प्रचलित भाषाओं के साथ लोक एवं जनजातीय भाषाओं को भी देवनागरी के माध्यम से लिखित रूप में लाया जाए।
ये विचार राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, नागरी लिपि परिषद नई दिल्ली, इकाई मध्यप्रदेश एवं हिंदी परिवार इंदौर, इकाई उज्जैन द्वारा नागरी लिपि परिषद के स्वर्ण जयन्ती वर्ष के अवसर पर प्रेस क्लब में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किया।

नागरी लिपि परिषद के संस्थापक आचार्य विनोबा भावे के जन्मदिवस नागरी दिवस पर आयोजित इस संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय साहित्य परिषद मालवा प्रान्त के अध्यक्ष त्रिपुरारी लाल शर्मा, इंदौर ने कहा कि विनोबा जी का भूदान आन्दोलन के साथ, नागरी लिपि परिषद की स्थापना कर देवनागरी लिपि को विश्वलिपि का सम्मान दिलाना बहुत बड़ा योगदान था।
सारस्वत अतिथि राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना की राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. रश्मि चौबे, गाजियाबाद उप्र ने कहा कि देवनागरी लिपि एक वैज्ञानिक लिपि है जिसे जैसा बोलते हैं वैसा ही लिखते हैं और जैसा लिखते हैं वैसा ही बोला जाता है। देवनागरी लिपि की स्वीकार्यता बढ़ रही है। संगोष्ठी को कनाडा से पधारे साहित्यकार गोपाल बघेल ने भी संबोधित किया और अपनी गीति रचनाएं प्रस्तुत की।
विशिष्ट वक्ता के रूप में बोलते हुए साहित्यकार डॉ. हरीश कुमार सिंह ने कहा कि हिन्दी सिर्फ राजकाज की भाषा, राजभाषा बन कर रह गई है और अब समय आ गया है कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में राष्ट्रीय प्रतिष्ठा भी मिले।
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए शिक्षाविद राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के सरंक्षक ब्रजकिशोर शर्मा ने कहा कि तपस्वी-मनीषी विनोबा जी ने देवनागरी और हिन्दी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और हिन्दी में विनोबा जी के कार्य अद्वितीय रहे।
राष्ट्रीय संगोष्ठी में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के हिन्दी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. जगदीशचंद्र शर्मा को आचार्य विनोबा भावे नागरी लिपि सेवा सम्मान एवं वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष नागरी लिपि परिषद नई दिल्ली के स्व. डॉ. शहाबुद्दीन शेख की स्मृति में पांच हजार रुपये की सम्मान निधि, शाल श्रीफल सहित अतिथियों द्वारा प्रदान की गयी।
संगोष्ठी में अतिथियों प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा, त्रिपुरारी लाल शर्मा, ब्रजकिशोर शर्मा, डॉ. रश्मि चौबे, डॉ. प्रभु चौधरी, साहित्यकार गोपाल बघेल, सुन्दरलाल मालवीय, डॉ. हरीशकुमार सिंह, रंजना पांचाल, पायल सोलंकी, सीमा देवेन्द्र, श्यामलाल चौधरी, हीरालाल सिरोलिया, बसंत जैन आदि को विनोबा नागरी लिपि सम्मान, स्मृति चिन्ह एवं अभिनंदन पत्र अर्पित किए गए।
अतिथियों ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप आलोकन कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। स्वागत भाषण नागरी लिपि परिषद के प्रदेश संयोजक डॉ. प्रभु चौधरी ने दिया। आयोजन में सुंदरलाल मालवीय, दयाराम सारोलिया आदि उपस्थित थे।
अतिथि स्वागत प्रदेश सचिव रंजना पांचाल, संजय चौबे आदि ने किया। संचालन सीमा देवेन्द्र ने किया और आभार लोकगायक श्यामलाल चौधरी ने व्यक्त किया।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।



