64 वर्ष पुरानें आयकर अधिनियम 1961 से बहुत छोटा- अनावश्यक शब्दों, धाराओं, अध्यायों को हटाया गया
संसद में एसआईआर मुद्दे पर हंगामें के बीच, मात्र 3 मिनट में नया आयकर विधेयक 2025, ध्वनिमत से पारित- 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना
अधिवक्ता किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र। वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलते परिपेक्ष में अगर तेजी से विकास की रफ्तार पकड़ता है तो, हर देश को अपना इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य परिवहन इत्यादि हर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का लाभ लेकर उन्हें आधुनिक बनाना होगा, जिसके लिए पैसे की आवश्यकता होगी जो प्रतिवर्ष बजट के माध्यम से इंतजाम किया जाता है। भारत ने तो इन सभी उपायों पर तेजी से कदम बढ़ाना शुरू कर दिया हैं। मैं यह मानता हूं कि विजन 2047 को पूरा करने के लिए आम नागरिकों को आगे आकर टैक्स भरने के लिए जागृत किया जा रहा है, इसके लिए ही आयकर अधिनियम को छोटा व आसन बनाकर 11 अगस्त को लोकसभा में व 12 अगस्त 2025 को राज्यसभा में पारित करवाया गया है, जिस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद यह कानून बन जाएगा और 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना व्यक्ति की गई है।
मेरी केंद्र व राज्य सरकारों से इस आलेख के माध्यम से अपील व सुझाव है कि करों की प्रक्रिया व शर्तों को आसान बनाकर टैक्स देने वालों की संख्या में वृद्धि तो होगी परंतु वह अधिक मात्रा में आया हुआ टैक्स अगर रेवड़ियां बांटने में निकल जाता है तो, विकास की रफ्तार को ढीला कर देता है। इसलिए रेवड़ियां बांटने पर लगाम लगाने के लिए 31 अगस्त 2025 तक चलने वाले इस मानसून सत्र में ही बिल बनाकर निचले व ऊपरी सदन में ध्वनि मत से या फिर इसी तरह 3-4 मिनट में ही पारित करा लिया जाता है तो कर दाताओं की मेहनत से कमाई गाढ़ी कमाई रेवड़िया बांटने में नहीं जाएगी। चूँकि 64 वर्षों पुराना आयकर अधिनियम 1961 को अब अनायस शब्दों धाराओं अध्यायों को हटाकर अब छोटा व आसान बनाया गया है, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आलेख के माध्यम से चर्चा करेंगे नया आयकर बिल 2025 संसद के दोनों सदनों में पारित- राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से अब कानून बन जाएगा- करोड़ों करदाताओं पर होगा सीधा असर!

साथियों बात अगर हम नए आयकर विधेयक 2025 को पारित करने की पूरी थियोरी की करें तो, केंद्रीय वित्त मंत्री ने पिछले हफ्ते लोकसभा से आयकर विधेयक, 2025 के पुराने मसौदे को औपचारिक रूप से वापस ले लिया था इस बिल का अपडेटेड वर्जन आज पेश किया गया था। लोकसभा की प्रवर समिति ने लगभग 285 सिफारिशें की थी और पिछले महीने संसद को 4,500 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें विधेयक में सुधार का प्रस्ताव दिया गया। बता दें कि मूल विधेयक फरवरी में संसद के बजट सत्र के दौरान पेश किया गया था। विधेयक में मौजूदा कानून के अनावश्यक प्रावधानों और पुरानी भाषा को हटा दिया गया है और 1961 के आयकर अधिनियम में धाराओं की संख्या 819 से घटाकर 536 और अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 कर दी गयी है।
नए आयकर विधेयक में शब्दों की संख्या 5.12 लाख से घटाकर 2.6 लाख कर दी गई है। विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति के बीच वित्तमंत्री ने कहा कि ये बदलाव केवल सतही नहीं हैं। ये टैक्स प्रशासन के प्रति नए और सरलीकृत दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। यह अधिक संक्षिप्त और अधिक केंद्रित कानून है, जिसे पढ़ने, समझने और लागू करने में आसानी होगी। कहा जा रहा है कि यह नया इनकम टैक्स बिल 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसे तैयार करने में काफी समय लगा है। इसके साथ ही डिजिटल युग की जरूरतों के अनुसार इसे ढाला गया है। वहीं प्रीवियस ईयर और असेसमेंट ईयर जैसे ऑप्शन को खत्म टैक्स ईयर कॉन्सेप्ट शुरू किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि 1961 का आयकर अधिनियम में दशकों तक संशोधन किया गया। इसमें कई जटिलातएं है। यह काफी पुराना हो गया था। ऐसे में एक नए बिल की जरूरत महसूस की जा रही थी। नए बिल को आधुनिक अर्थव्यवस्था के तहत बनाया गया है। नए कानून में भाषा को सरल बनाया गया है ताकि आम टैक्स पेयर्स इसे आसानी से समझ सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नए कानून में इनकम टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं होगा।
(1) इस नए बिल को 536 धाराओं और 16 अनुसूचियों में व्यवस्थित किया जाएगा, ताकि इसे समझना और पढ़ना दोनों आसान हो।
(2) शून्य टीडीएस प्रमाणपत्र की सुविधा मिलेगी।
(3) डिविडेंड में कटौती को लेकर सेक्शन 80 एम की फिर से शुरुआत की जाएगी।
(4) आईटीआर फाइल चाहे डेडलाइन के बाद किया हो, लेकिन रिफंड मिलने में परेशानी नहीं होगी।
(5) ऐसे सभी क्लास को हटाया जाएगा, जो इसे सपोर्ट नहीं करते।
(6) ऐसी बिजनेस प्रॉपर्टी जिनका इस्तेमाल न हो रहा हो या लंबे से खाली हो, उन पर टैक्स नहीं लिया जाएगा, सहित और भी ऐसे कई प्रावधान हैँ, जो करदाताओं के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।
साथियों बात अगर हम इस नए आयकर अधिनियम 2025 को पारित करने में काफी जद्दोजहद की करें तो, बता दें कि साल 2010 में प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक, 2010 संसद में पेश किया गया था। इसे जांच के लिए स्थाई समिति के पास भेजा गया था। हालांकि, 2014 में सरकार बदलने के कारण विधेयक निरस्त हो गया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार (7 फरवरी, 2025) को नए इनकम टैक्स बिल को मंजूरी दे दी, यह बिल छह दशक पुराने आईटी अधिनियम की जगह लेगा। नया बिल इनकम टैक्स से जुड़े उन सभी संशोधनों और धाराओं से मुक्त होगा जो अब प्रासंगिक नहीं हैं। साथ ही भाषा ऐसी होगी कि लोग इसे टैक्स एक्सपर्ट की सहायता के बिना समझ सकें।
इस बिल में प्रावधान और स्पष्टीकरण या कठिन वाक्य नहीं होंगे। इस से मुकदमेबाजी कम करने में भी मदद मिलेगी और इस तरह विवादित टैक्स डिमांड में कमी आएगी। चूँकि बजट में माननीय वित्तमंत्री ने घोषणा की थी कि एक सप्ताह के भीतर एक नया आयकर अधिनियम 2025 लाया जाएगा, इसलिए ही आज दिनांक 7 फरवरी 2025 को देर रात्रि केंद्रीय वित्तीय कैबिनेट ने आयकर अधिनियम 2025 (डायरेक्ट टैक्स कोड 2025) को मंजूरी दी थी, फ़िर संसदीय स्थाई समिति के पास भेजा गया था। नए बिल में संभावित कुछ ऐसे प्रावधान प्रस्तावित है जो कार्यकारी आदेशों के माध्यम से कटौती या छूट की सीमा और राशियों को बदलने की अनुमति देंगे।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका उद्देश्य विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि नया आयकर बिल 2025 संसद के दोनों सदनों में पारित- राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से अब कानून बन जायेगा- करोड़ों करदाताओं पर होगा सीधा असर! 64 वर्ष पुरानें आयकर अधिनियम 1961 से बहुत छोटा- अनावश्यक शब्दों धाराओं अध्यायों को हटाया गया। संसद में एसआईआर मुद्दे पर हंगामें के बीच, मात्र 3 मिनट में नया आयकर विधेयक 2025, ध्वनिमत से पारित-1 अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना।
(स्पष्टीकरण : उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। यह जरूरी नहीं है कि कोलकाता हिंदी न्यूज डॉट कॉम इससे सहमत हो। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है।)
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