खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर ज़िले के दाँतन -1 विकास खंड अंतर्गत स्थित मोगलमारी बौद्ध महाविहार के संरक्षण एवं समग्र विकास की संभावनाओं के आकलन हेतु जिला शासक बिजिन कृष्ण द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर अतिरिक्त जिला शासक (विकास) नवनीत मित्तल एवं संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्राचीन अवशेषों की वर्तमान स्थिति, संरचनात्मक संरक्षण, आधारभूत सुविधाओं तथा संभावित पर्यटन विकास के विभिन्न आयामों की समीक्षा की।
स्थानीय प्रतिनिधि अतनु प्रधान ने महाविहार के ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पुरातात्त्विक महत्व की जानकारी देते हुए इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्ध तीर्थ एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

उल्लेखनीय है कि छठी से बारहवीं शताब्दी के मध्य स्थापित यह प्राचीन बौद्ध महाविहार पश्चिम बंगाल के प्रमुख एवं विस्तृत मठ परिसरों में से एक माना जाता है। उत्खनन में प्राप्त स्टुको अलंकरण, सजावटी ईंटें तथा बौद्ध प्रतिमाएँ इसकी ऐतिहासिक महत्ता को प्रमाणित करती हैं।
निरंतर पुरातात्त्विक अनुसंधान से इस क्षेत्र के प्राचीन इतिहास एवं सांस्कृतिक विरासत संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य प्रकाश में आए हैं, जिससे यह स्थल शोधार्थियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।
ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, क्षेत्र का प्राचीन नाम दंडभुक्ति था तथा सातवीं शताब्दी में शशांक के शासनकाल से संबंधित अभिलेख भी प्राप्त हुए हैं। स्थानीय परंपराओं एवं ऐतिहासिक विवरणों में 1575 ईस्वी के मुगल-पठान संघर्ष का उल्लेख मिलता है, जिससे ‘मोगलमारी’ नाम की उत्पत्ति संबंधित मानी जाती है।
जिला प्रशासन द्वारा किए गए इस निरीक्षण का उद्देश्य स्थल के संरक्षण, समुचित अधोसंरचना विकास, पर्यटक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा ऐतिहासिक धरोहर के संवर्धन हेतु समन्वित कार्ययोजना तैयार करना है।
प्रशासन ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कदम उठाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जिससे यह प्राचीन विरासत स्थल सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं पर्यटन की दृष्टि से और अधिक सशक्त रूप में उभर सके।
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