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भारतीय भाषा परिषद में नेताजी की विचारधारा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन, कई विभूतियां हुईं सम्मानित

कोलकाता, 27 जनवरी 2026: कोलकाता के शेक्सपियर सरणी स्थित भारतीय भाषा परिषद सभागार में 25 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा पर एक भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ।

भारतीय भाषा परिषद, भाषा संस्कृति सेतु और बंगीय हिन्दी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और भाषायी विविधता में निहित एकता को मजबूत करना तथा राष्ट्रभाव को सशक्त करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. सोमा बंद्योपाध्याय (कुलपति, बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय), प्रधान अतिथि डॉ. प्रबीर मुखोपाध्याय (पूर्व अध्यक्ष, दामोदर वैली कॉरपोरेशन),

विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध अभिनेत्री उमा झुनझुनवाला, भारतीय भाषा परिषद के निदेशक प्रो. शंभुनाथ, परिषद की संरक्षक विमला पोद्दार, आशीष झुनझुनवाला,

घनश्याम शुक्ला तथा भाषा संस्कृति सेतु की अध्यक्ष एवं आयोजन संयोजक डॉ. उर्वशी श्रीवास्तव द्वारा संयुक्त दीप प्रज्वलन से हुआ।

भक्तिमय शुरुआत और सांस्कृतिक प्रस्तुति

शुरुआत पूर्णश्री रॉय घोष के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय नृत्य सरस्वती वंदना से हुई, जिसने पूरे सभागार को भक्तिमय और सांस्कृतिक गरिमा से भर दिया।

स्वागत वक्तव्य विमला पोद्दार ने प्रस्तुत किया, जबकि आयोजन की भावभूमि और उद्देश्य डॉ. उर्वशी श्रीवास्तव ने श्रोताओं के समक्ष रखा।

संगोष्ठी में नेताजी पर गहन चर्चा

राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रधान वक्ता प्रो. हितेन्द्र पटेल (रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय) ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन, विचारधारा और शोधपरक कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने प्रतिपादित किया कि नेताजी की वैचारिक धारा भिन्न थी, लेकिन वे महात्मा गांधी के विरोधी नहीं थे।

डॉ. सत्य प्रकाश दुबे और डॉ. सुरेश चौधरी ने नेताजी की राष्ट्रवादी चेतना, साहस और त्याग पर अपने विचार रखे।

सम्मान समारोह: भाषा संस्कृति सेतु और भाषा संवर्धन सम्मान

कार्यक्रम में ‘भाषा संस्कृति सेतु सम्मान’ और ‘भाषा संवर्धन सम्मान’ के तहत साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली कई विभूतियों, संस्थाओं और मीडिया प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वालों में शामिल हैं:

  • डॉ. विजय कुमार भारती
  • डॉ. प्रबीर मुखोपाध्याय
  • श्री राजेंद्र केडिया
  • डॉ. सुरेश चौधरी
  • श्रीमती उमा झुनझुनवाला
  • प्रो. शंभुनाथ
  • विशंभर नेवर

सांस्कृतिक सत्र में ओज और भावुकता

सांस्कृतिक सत्र में नंदू बिहारी मिश्र ने वीर रस की कविताओं से श्रोताओं में ओज और उत्साह का संचार किया। आलोक चौधरी ने रचित गीत ‘एक सुभाष कहीं से ला दो’ का भावपूर्ण गायन किया।

डॉ. उर्वशी श्रीवास्तव द्वारा लिखित देशगीत ‘मेरी शान तिरंगा है’ की सामूहिक प्रस्तुति ने सभागार को देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत कर दिया।

यह संगोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रम न सिर्फ नेताजी की विचारधारा को जीवंत किया, बल्कि भारतीय भाषाओं और संस्कृति की एकता को भी मजबूत करने का सशक्त संदेश दिया।

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