कोलकाता। शरत सदन के सेमिनार हाॅल में साहित्यिक संस्था “नव-सृजन : एक सोच” ने अपना 10वां स्थापना दिवस मनाया, इस अवसर पर 25 कवि-कवयित्रियों की कविताओं से सुसज्जित एक साझा काव्य संग्रह “साझा स्वर” का लोकार्पण भी हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के सह संस्थापक अमित कुमार अम्बष्ट ‘आमिली’ के स्वागत भाषण से हुई, तत्पश्चात कार्यक्रम की संचालिका मौसमी प्रसाद ने कार्यक्रम का बागडोर सम्भाला।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में चंद्रिका प्रसाद अनुरागी उपस्थित रहे। जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर मंच पर मौजूद रहे वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. हृदय नारायण ‘अभिज्ञात’, वरिष्ठ साहित्यकार एवं समालोचक रश्मि पांडा, कवि अनिल उपाध्याय, सुप्रसिद्ध कवयित्री ज्योति कुंदर एवं वरीय अधिवक्ता चन्द्र भूषण प्रसाद अम्बष्ट शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत मंचासीन अतिथियों ने मां सरस्वती को पुष्प अर्पित तथा दीप प्रज्ज्वलित कर के किया, तत्पश्चात गणेश वंदना गाकर भारती मिश्रा एवं सरस्वती वंदना गाकर स्वागता बसु ने कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की।
अतिथि वक्ताओं में शामिल रहे मरुतृण साहित्य पत्रिका के संपादक सत्य प्रकाश भारतीय, विनिर्माण बांग्ला साहित्य पत्रिका के सम्पादक पार्थो सारथी मौसम, कवि एवं साहित्यकार शिव शंकर सिंह तथा सभी अतिथि वक्ताओं ने पुस्तक और हिंदी साहित्य पर अपने विचार रखा, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता मुंबई से पधारी ज्योति कुंदर ने ही किया।
इस अवसर पर “साझा स्वर” काव्य संग्रह में शामिल सभी रचनाकारों को सम्मानित किया गया जिसमें शामिल रहे अमित कुमार “अंबष्ट”,(कोलकाता), रवि कुमार “रवि” (पटना), मौसमी प्रसाद, (कोलकाता), छाया सिंह, (नई दिल्ली), सीमा कुमारी साह (मिदनापुर), राजेंद्र सिंह रावत (नई दिल्ली),
मंजू चौहान, (गाजियाबाद), मनोरमा जैन “पाखी” (भिण्ड), गौरव मिश्रा (लखीमपुर,यू.पी.) ज्योतिका प्रसाद (कोलकाता), सपना मंडल, (गुवाहाटी), ज्योति कुंदर, (मुंबई), प्रवीण माटी (भिवानी, हरियाणा), रमाकांत सिन्हा (कोलकाता), उषा जैन “उर्वशी” (कोलकाता), स्वागता बसु, (कोलकाता), भारती मिश्रा, (कोलकाता),
जयकांत पंडित (दुमका), बिभा वर्मा (गाजियाबाद), डाॅ. राजन शर्मा, (कोलकाता), वनिता झारखंडी, (कोलकाता) प्रणति ठाकुर, (कोलकाता), अशोक सैनी (मुरादाबाद, यू.पी.), अपर्णा थपलियाल (देहरादून, उत्तराखंड) एवं अनुराधा सिंह अनु (कोलकाता)।
गौरतलब है कि “स्वर साझा” पुस्तक का संपादन संस्था के सह संस्थापक रवि कुमार रवि एवं अमित कुमार अम्बष्ट “आमिली” ने किया है। इस अवसर पर रवि कुमार “रवि” ने अपनी एक कविता “जूते की किस्मत” का पाठ भी किया। कार्यक्रम का समापन रमाकांत सिन्हा ने सभी अतिथियों का धन्यवाद देकर किया।
इस अवसर कोलकाता के अनेक गणमान्य साहित्यकार एवं कवि जिसमें विशेष रूप से रामनाथ बेखबर, सरिता खोवाला, नवीन सिंह, पुनीत अग्रवाल, शिव सुन्दर दास शिप्रा मिश्रा, रंजीत भारती, चित्रा रॉय, रौनक अफरोज, विश्वजीत ठाकुर, एवं अन्य उपस्थित रहे।
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