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डॉ. अम्बेडकर चिन्तन के विविध आयाम और उनकी प्रासंगिकता विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी महापरिनिर्वाण दिवस पर सम्पन्न

उज्जैन। राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना की 278वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी डॉ. अम्बेडकर चिन्तन के विविध आयाम और उनकी प्रासंगिकता विषय पर वक्ताओं ने अपने विचार संविधान निर्माता के महापरिनिर्वाण दिवस पर व्यक्त किए। राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने सम्बोधन में कहा कि डॉ. अम्बेडकर सामाजिक न्याय के पुरोधा के रूप में जाने जाते है।

भारत में सामाजिक न्याय की बात की जाय तो वो वर्षो पहले प्रारम्भ हो गई थी। कबीर, रविदास, चोखेमाला, ज्योतिबा फूले, सावित्री बाई फूले, रानाडे, बाबासाहेब अम्बेडकर, संत गाडगे आदि सभी ने समाज को एकरस बनाने का अथक प्रयास किया।

डॉ. अम्बेडकर और सामिजिक न्याय को समझने से पूर्व सामाजिक न्याय है क्या इसको समझते है- अगर सामान्य अर्थो में देखे तो सामाजिक न्याय समाज के अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्गो मजदूरों तथा महिलाओं को समाज में बराबरी का हक मिले इसे ही सामाजिक न्याय कहा जाता है।

सामाजिक न्याय शब्द सर्वप्रथम सन् 1840 में सिसली के पादरी द्वारा प्रयोग में लाया गया था। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जब सामाजिक न्याय शब्द प्रसिद्ध हुआ तो सबसे पहले कृषि क्षेत्र से स्थांतरित मजदूर वर्ग के लिए ये प्रयुक्त हुआ कि आम जनता की आवश्यकताओं पर ध्यान देने के लिए शासक वर्ग से एक अपील के रूप में इस्तेमाल किया गया।

सामाजिक न्याय का मूल आधार है समाज के वंचित, शोषित और दीन-हीन वर्गो का उत्थान। इसका प्रमुख उद्देश्य मानव जाति को सामाजिक व आर्थिक शोषण एवं भेदभाव की पारंपरिक जकड़न से मुक्त कराना है।

विशिष्ट वक्ता एवं राष्ट्रीय संगठन महामंत्री डॉ. प्रभु चौधरी ने बताया कि बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर बीसवीं शताब्दी के महान शिक्षाविद् एवं सामाजिक क्रान्ति के अग्रदूत नेता रहे है।

भारतरत्न डॉ. अम्बेडकर जी बुद्धिजीवी, विद्वान तथा राजनीतिक व्यक्ति थे। आपका देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारत के संविधान निर्माण के लिये संविधान प्रारूप समिति में अध्यक्ष के रूप में रहे। वे सामाजिक न्याय के संघर्ष के प्रतीक है।

संगोष्ठी के शुभारम्भ में सरस्वती वंदना संचालक श्वेता मिश्रा ने प्रस्तुत की। संगोष्ठी की प्रस्तावना राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शहेनाज शेख ने वक्तव्य में कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने शिक्षा, समानता और प्रेम का संदेश दिया। उन्होने दलित, शोषित एवं महिलाओं को अन्य लोगो की तरह समान ही कानूनी अधिकार दिलाने के लिए अनेक आंदोलनों का नेतृत्व किया और समाज के लोगो को मानवाधिकार दिलाए।

विशिष्ट अतिथि हरेराम वाजपेयी अध्यक्ष हिन्दी परिवार इन्दौर ने डॉ. अम्बेडकर जी के कार्यो की सराहना की। राष्ट्रीय संयोजक पदमचंद गांधी जयपुर, ने अध्यक्षीय भाषण दिया।

समारोह में राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला डॉ. अनसूया अग्रवाल, राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. रश्मि चौबे गाजियाबाद, अंशु जैन देहरादून, सुवर्णा जाधव, डॉ. सुषमा कोंडे पुणे, डॉ. जया सिंह रायपुर, डॉ. आनन्दी सिंह लखनऊ,

डॉ. हरिसिंह पाल नई दिल्ली, माया मेहता मुम्बई, कामिनी श्रीवास्तव लखनऊ आदि ने भी डॉ. भीमराव अम्बेडकर पर उद्बोधन दिया। संगोष्ठी का सफल संचालन श्वेता मिश्रा ने किया एवं आभार रंजना पांचाल मध्यप्रदेश महासचिव ने माना।

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